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Thursday, April 30, 2026

पॉल्यूशन में खुद को बीमार होने से कैसे बचाएं?

ऐसे में हम में से कई लोग जुकाम, खांसीआंखों में जलन, सांस लेने में परेशानी और गले के इंफेक्शन जैसी समस्याओं से परेशान हैं। यह सब चीजें पॉल्यूशन की वजह से हो रही हैं, लेकिन आप इनसे खुद भी बच सकते हैं और अपने परिवार वालों को भी बचा सकते हैं।


आज हम आपको ऐसे ही 3 असरदार नुस्खों के बारे में बताने वाले हैं जो पॉल्यूशन और हवा में बढ़ती ठंड के कारण होने वाले बीमारियों से आपको बचाने में मदद करेंगे। 

डाइट में रखें न कोई भी कमी

जी हांआप शरीर हेल्दी तब रहता है जब आप उसे पोषण दे रहे होते हैंवरना अगर शरीर जब पोषण नहीं मिलता है तो वह जल्दी-जल्दी बीमार होने लगता है। इसलिए आप बाहर का खाने के बजाय घर का हेल्दी खाना खाएं और फ्रूट्स का सेवन करें। साथ ही समय समय पर नट्स और जूस भी पीते रहें।


  • शरीर में पोषण की कमी से हम जल्दी बीमार हो जाते हैं।
  • पॉल्यूशन से होने वाली बीमारियों से बचने का तरीका है कि आप इम्यूनिटी को बूस्ट करें।
  • इम्यूनिटी को बूस्ट करने के लिए कच्ची हल्दीतुलसीकाढ़ा आदि का सहारा लें।

अर्जुन की छाल का काढा


अर्जुन की छाल में एक नहीं बल्कि कई पोषक तत्व पाए जाते हैंजैसे कि टैनिनफाइटोकेमिकल्सफ्लेवोनोइड्स आदि। यह सभी इम्यूनिटी को बूस्ट करने के साथ-साथ हाई ब्लड प्रेशर को कंट्रोल करनेहार्ट को हेल्दी रखने और गट को क्लीन करने में मदद करते हैं। आप रोजाना अदरकतुलसीकाली मिर्च और अर्जुन की छाल को पानी में उबालकर पाल्यूशन से बचने वाला काढा बना सकते हैं।

रोज पीना शुरू करें कच्ची हल्दी और तुलसी की चाय


आप खुद को हेल्दी रखने के लिए और पॉल्यूशन के कारण होने वाली बीमारियों से खुद को बचाने के लिए कच्ची हल्दी और तुलसी की चाय पी सकते हैं। एक ओर जहां कच्ची हल्दी में एंटीबैक्टीरियल, एंटीफंगल, एंटीसेप्टिक और करक्यूमिन, बीटा-कैरोटीन, एस्कॉर्बिक एसिड, कैल्शियम, फाइबर, आयरन, जिंक, पोटेशियम और फ्लेवोनोइड्स जैसे पोषक तत्व पाए जाते हैं। 

तो वहीं तुलसी में कूलिंग एजेंट, विटामिन सी, , के और बी-कॉम्प्लेक्स जैसे विटामिन्स, कैल्शियम, आयरन और जिंक जैसे खनिज व एंटीऑक्सीडेंट, सूजन-रोधी, तनाव कम करने और पाचन में सुधार करने वाले तत्व भी पाए जाते हैं जो हमारी सेहत के लिए बहुत ही ज्यादा फायदेमंद होते हैं। यह इम्यूनिटी को तेजी से बूस्ट करने और हमें जल्दी बीमार होने से रोकते हैं। 

कैसे बनाएं तुलसी और कच्ची हल्दी की चाय


आप 1 गिलास पानी को पैन में डालकर गैस में चढ़ा दें और उसमें 1 इंच करीब कच्ची हल्दी का टुकड़ा लें और 5-6 तुलसी की पत्तियां डालकर अच्छे से पका लें। जब पानी आधा गिलास जितना रह जाए तो गैस बंद कर दें और इसे धीरे-धीरे पिएं। ये आम सी चाय आपकी इम्यूनिटी को बूस्ट करने और बीमारियों को दूर रखने में मदद करेंगी।



 

Wednesday, April 29, 2026

पेशाब में जलन होती है

अगर आपको कभी-कभार पेशाब में जलन होती है तो आप कुछ होममेड जूस भी पी सकते हैं। इससे शरीर को ठंडक मिलती है, पेशाब ज्यादा मात्रा में निकलता है और इंफेक्शन पैदा करने वाले बैक्टीरिया भी निकल जाते हैं। इससे पेशाब की जलन धीरे-धीरे कम होने लगती है। हालांकि, पेशाब में जलन होने पर एक बार चेकअप जरूर कराना चाहिए। पेशाब में जलन एक आम लेकिन गंभीर समस्या मानी जाती है। अगर आपको बार-बार पेशाब में जलन होती है, तो इस स्थिति में डॉक्टर से मिलना और यूरिन टेस्ट करवाना बहुत जरूरी है। इससे पेशाब में जलन का असल कारण पता चल सकता है।


पेशाब की जलन कम करने के लिए जूस

पेशाब में जलन होने पर आप कुछ जूस का सेवन कर सकते हैं। इनसे पेशाब के साथ बैक्टीरिया और विषाक्त पदार्थ भी बाहर निकल जाएंगे।

1. आंवला जूस


पेशाब की जलन शांत करने के लिए आप आंवला जूप भी पी सकते हैं। आंवला जूस में विटामिन-सी, एंटीऑक्सीडेंट्स और कूलिंग इफेक्ट्स होते हैं, जो पेशाब की जलन को शांत करते हैं। आंवला में मौजूद इन्हीं गुणों की वजह से पेशाब की जलन कम होती है। आंवला, इंफेक्शन पैदा करने वाले बैक्टीरिया को भी नष्ट करने में मदद करता है। आंवला जूस पीने से बॉडी डिटॉक्स होती है और सभी विषाक्त पदार्थ बाहर निकल जाते हैं।

2. नारियल पानी


अगर आप पेशाब में जलन से परेशान हैं, तो नारियल पानी पी सकते हैं। नारियल पानी में शीतलता होती है, जिससे पेशाब की जलन कम होती है। पेशाब की जलन से राहत पाने के लिए आपको रोज सुबह एक गिलास नारियल पानी जरूर पीना चाहिए। नारियल पानी मूत्रवर्धक होता है, इसे पीने से ज्यादा पेशाब के साथ बैक्टीरिया और अपशिष्ट पदार्थ भी बाहर निकल जाते हैं। कुछ दिनों तक रोजाना नारियल पानी पीने से आपको पेशाब की जलन से काफी राहत मिल सकती है।

  • पेशाब की जलन शांत करने के लिए आप आंवला जूस पी सकते हैं।
  • रोजाना 8 से 10 गिलास नॉर्मल पानी पीना भी बहुत जरूरी होता है।
  • पेशाब की जलन कम करने के लिए नारियल पानी जरूर पिएं।

3. क्रैनबेरी जूस


पेशाब में जलन होने पर आप क्रैनबेरी का जूस पी सकते हैं। इस जूस को यूटीआई के लिए बेहद असरदार माना जाता है। अगर यूटीआई की वजह से पेशाब में जलन हो रही है, तो इस जूस को पीने से आपको आराम मिल सकता है। यह बैक्टीरिया को यूरिनरी ट्रैक्ट की दीवारों पर चिपकने से रोकता है। अगर आप कुछ दिनों तक रोजाना इस जूस का सेवन करेंगे, तो इससे जलन से राहत मिल सकती है।

4. धनिया का जूस


पेशाब की जलन से राहत पाने के लिए आप धनिया का जूस पी सकते हैं। धनिया के जूस शरीर को ठंडक प्रदान करता है, इससे पेट की जलन और एसिडिटी शांत होती है। धनिया मूत्रवर्धक भी होता है, इसलिए इस जूस को पीने से पेशाब की जलन शांत होती है। धनिया का जूस पीने से यूरिन फ्लो बढ़ता है और बैक्टीरिया बाहर निकल जाते हैं। इससे यूरिनरी ट्रैक्ट साफ हो जाता है और जलन में भी आराम मिलता है।


Monday, April 27, 2026

गुलाबी फिटकरी क्यों और कैसे फायदेमंद

आज के समय में काफी कम लोग फिटकरी का प्रयोग करते हैं। लेकिन फिटकरी का इस्तेमाल करना आपके लिए काफी फायदेमंद हो सकता है। लंबे समय से इसका प्रयोग स्किन पर होने वाली परेशानियों को दूर करने के लिए किया जा रहा है। इसके कई फायदे होते हैं। अगर आप भी फिटकरी का प्रयोग करने जा रहे हैं, तो पिंक यानि गुलाबी फिटकरी का इस्तेमाल करें। गुलाबी फिटकरी के फायदे कई ज्यादा हैं। यह अपने कसैले गुणों के लिए जाना जाता है, यह स्किन को कसने और टोन करने से लेकर घावों को भरने में असरदार होता है। आइए इस लेख में विस्तार से जानते हैं गुलाबी फिटकरी से होने वाले फायदे क्या हैं और इसका कैसे इस्तेमाल करें?


गुलाबी फिटकरी के नुकसान क्या हैं

गुलाबी फिटकरी के कई फायदे  हैंलेकिन फिर भी इसका इस्तेमाल सावधानी से करना जरूरी है। कुछ लोगों इसका इस्तेमाल करने के बाद स्किन पर जलन हो सकती है। कई बार इसके इस्तेमाल से स्किन पर ड्राईनेस और खुलजी की परेशानी हो सकती है। ऐसे में अगर आप पहली बार गुलाबी फिटकरी लगा रहे हैंतो पैच टेस्ट जरूर करें।


  • गुलाबी फिटकरी चेहरे पर होने वाली परेशानी कम कर सकता है।
  • घाव को भरने के लिए गुलाबी फिटकरी का प्रयोग कर सकते हैं।
  • नहाने के पानी में मिक्स करके इसका इस्तेमाल किया जा सकता है।

गुलाबी फिटकरी कैसे लगाएं?

गुलाबी फिटकरी का इस्तेमाल आप कई तरह से कर सकते हैं, जैसे-


  1. नहाने के पानी में गुलाबी फिटकरी मिक्स करें। इस पानी से नहाने से स्किन की परेशानी कम हो सकती है।
  2. चेहरे पर गुलाबी फिटकरी लगाने के लिए आप इसके पाउडर को गुलाब जल के साथ मिक्स कर सकते हैं। चेहरे पर इसे लगाने से झुर्रियां, रिंकल्स कम हो सकते हैं।
  3. घाव पर पाउडर के रूप में गुलाबी फिटकरी लगा सकते हैं।

गुलाबी फिटकरी के क्या फायदे हैं?

गुलाबी फिटकरी के इस्तेमाल करने से कई फायदे हो सकते हैं। आइए जानते हैं इसके फायदे-

पिंपल्स और ऑयली स्किन से छुटकारा


अगर आप नियमित रूप से गुलाबी फिटकरी का इस्तेमाल करते हैंतो इससे स्किन पर कसाव आता है। इसके कसैले गुण स्किन पर अतिरिक्त तेल के जमाव को कम करते हैं। इससे आपकी स्किन फ्रेश नजर आती है। साथ ही पिम्पल्सकी परेशानी को दूर किया जा सकता है।

शेविंग के बाद होने वाली खरोंच की ब्लीडिंग को रोके


गुलाबी फिटकरी का प्रयोग शेविंग के बाद किया जा सकता है। इसके प्रयोग  से शेविंग के दौरान लगने वाली खरोंच की वजह से होने वाली ब्लीडिंग को रोका जा सकता है  इसके अलावागुलाबी फिटकरी बैक्टीरियल समस्याओं को भी दूर करने में प्रभावी हो सकता है।

दाग-धब्बों की परेशानी होती है कम


गुलाबी फिटकरी का प्रयोग करने से पिंपल्स की वजह से चेहरे पर होने वाले दाग-ध्बों की परेशानी को कम किया जा सकता है। यह स्किन के सेल्स को सिकोड़ सकता है। साथ ही  स्किन से तेल उत्पादन को कंट्रोल कर सकता है। गुलाबी फिटकरीआपकी स्किन के लिए काफी बेहतर हो सकता है। इसके अलावा यह चेहरे पर होने वाले छाले की परेशानी को भी कम करने में प्रभावी हो सकता है।


 

 

Saturday, April 25, 2026

पाद आए, तो अपनाएं ये 5 घरेलू उपाय

गर्मियों का मौसम आते ही कई लोगों का पाचन सुस्त हो जाता है। ऐसे लोगों को अक्सर गर्मियों में पेट में दर्द, कब्ज और बार-बार गैस (पाद) आने की समस्या बनी रहती है। गर्मी के मौसम में शरीर की पाचन शक्ति (डाइजेशन) थोड़ी कमजोर हो जाती है। ज्यादा तापमान के कारण पेट में एंजाइम का बैलेंस बिगड़ सकता है, जिससे खाना ठीक से नहीं पचता और गैस बनने लगती है। पेट में दर्द और कब्ज की परेशानी से तो डील करना आसान हो जाता है, लेकिन बार बार पाद आना कुछ मामलों में शर्मिंदगी और असहजता का कारण बन जाता है। 


पसीना, डिहाइड्रेशन और गलत खानपान के कारण अक्सर गर्मियों में लोगों को पाद आने की समस्या होती है। आइए जानते हैं बार- बार पाद आने वाली समस्या से राहत पाने के घरेलू उपाय

गर्मी के मौसम में शरीर की पाचन शक्ति (डाइजेशन) थोड़ी कमजोर हो जाती है। ज्यादा तापमान के कारण पेट में एंजाइम का बैलेंस बिगड़ सकता है, जिससे खाना ठीक से नहीं पचता और गैस बनने लगती है। ऐसे में आपको बार- बार पाद आती है। गर्मियों के मौसम में आप भी पाद की परेशानी से जूझते हैं, तो हम आपको बताने जा रहे हैं कौन से घरेलू उपाय आपको राहत दिला सकते हैं।

1. छाछ (मट्ठा) का सेवन


गर्मियों में लोग अक्सर खाना खाने के बाद छाछ का सेवन करते हैं। छाछ न सिर्फ पेट को ठंड रखता है, बल्कि बार- बार पाद आने की परेशानी  को भी दूर करता है। गर्मियों में पेट को ठंडा रखने के लिए आप छाछ में भुना जीरा और काला नमक मिलाकर भी पी सकते हैं।

2. जीरा पानी पिएं


गर्मियों में बार-बार पाद की समस्या को दूर करने के लिए जीरा पानी पिएं। एक गिलास पानी में आधा चम्मच जीरा उबालकर ठंडा करके पिएं। खाना खाने के आधे घंटे के बाद जीरा पानी पीने से पाचन क्रिया में सुधार आता है और बार- बार पाद आने की समस्या धीरे - धीरे कम होने लगती है।

3. अदरक का उपयोग


अदरक के छोटे टुकड़े पर नमक लगाकर खाने से पाचन एंजाइम एक्टिव होते हैं और गैस नहीं बनती। गर्मियों में खाली पेट अदरक और नमक मिलाकर चूसने से पाद आने की समस्या से बचाव होता है।

4. हींग का इस्तेमाल


पाद आने की समस्या से राहत दिलाने में हींग भी आपकी मदद कर सकती है। हींग में पाचन को मजबूत बनाने वाले तत्व पाए जाते हैं। 1 गिलास गुनगुने पानी में चुटकी भर हींग मिलाकर पीने से गैस तुरंत कम होती है। जिन लोगों को गर्मियों में बार-बार आने के साथ-साथ पेट में दर्द, कब्ज और पाचन से जुड़ी अन्य परेशानी भी रहती है, उन्हें रात को सोने से पहले गुनगुने पानी के साथ हींग का सेवन जरूर करना चाहिए।

  • गर्मियों में पाचन की परेशानी होना आम बात है।
  • खराब पाचन के कारण बार- बार पाद आती है।
  • पाद की समस्या से हींग राहत दिला सकता है।

 

5. अजवाइन और काला नमक


आधा चम्मच अजवाइन में चुटकी भर काला नमक मिलाकर खाने से तुरंत राहत मिलती है। यह गैस को बाहर निकालने में मदद करता है। गर्मियों में सुबह खाली पेट अजवाइन और काला नमक को एक साथ मिलाकर गुनगुने पानी के साथ लेने से गैस की परेशानी दूर होती है।



Thursday, April 23, 2026

ये 5 संकेत, लिवर की बीमारी को दर्शता है ....

 किन कारणों से होती है लिवर में गर्मी?

लिवर में गर्मी के कुछ सामान्य कारण हो सकते हैं, जैसे-


  • अधिक तला-भुना खाने वाले लोगों को लिवर में गर्मी हो सकती है।
  • ज्यादा शराब या स्मोकिंग करने वालों को यह परेशानी हो सकती है।
  • कम पानी पीना और लंबे समय तक दवाइयों का सेवन
  • स्ट्रेस और खराब लाइफस्टाइल के चलते लिवर में गर्मी की परेशानी होने की संभावना होती है।

लिवर में गर्मी के लक्षण क्या हैं? -


  1. लिवर में गर्मी बढ़ने पर मुंह में कड़वाहट या फिर बदबू जैसा फील होता है।
  2. कुछ लोगों को पेट में जलन की परेशानी होती है।
  3. पेट में भारीपन महसूस होना भी लिवर में गर्मी के संकेत हो सकते हैं।
  4. ज्यादा पसीना आना, आंखों में जलन होना जैसे लक्षण दिखाई देते हैं।
  5. भूख कम लगना और थकान जैसा फील होना भी लिवर की परेशानी के संकेत हो सकते हैं।

गिलोय और आंवला रस भी लिवर की गर्मी को करे शांत


आंवला विटामिन सी का अच्छा सोर्स होता है। वहीं, गिलोय को भी इम्यूनिटी बूस्टर के रूप में जाना ताहै। अगर आप इस मिश्रण का सेवन करते हैं, तो इससे लिवर की गर्मी को शांत करने में मदद मिल सकती है। यह पाचन में सुधार करने में काफी हद तक प्रभावी हो सकता है।

पर्याप्त रूप से पिएं पानी


लिवर की गर्मी को कम करने के लिए रोजाना 8 से 10 गिलास पानी पिएं। पानी पीने से शरीर की गंदगी को बाहर निकालने में मदद मिल सकती है। इसके साथ ही हमारा शरीर हाइड्रेट रहता है।

  • लिवर की गर्मी शांत करने के लिए ठंडी चीजों का सेवन करें।
  • आंवला लिवर की गर्मी को शांत करने में फायदेमंद है।
  • पर्याप्त मात्रआ में पानी पीने से लिवर की परेशानी दूर हो सकती है।

लिवर में गर्मी को दूर कैसे करें?


ठंडी या फिर पेट को शांत करने वाली चीजों को खाने से लिवर हीट को काफी हद तक कम किया जा सकता है। आइए जानते हैं कुछ आसान से तरीके-

सौंफ का शरबत पिएं


लिवर में गर्मी को अगर आप शांत करना चाहते हैं, तो सौंफ का शरबत आपके लिए फायदेमंद हो सकता है। सौंफ में पेट को ठंडा रखने का गुण होता है। इसे तैयार करने के लिए 2 चम्मच सौंफ लें, इसमें मिश्री को मिक्स करके अच्छे से ग्राइंड कर लें। अब इसे ठंडे पानी में मिक्स करके पिएं। आप चाहे, तो इसमें नींबू का रस भी एड कर सकते हैं। इससे लिवर की गर्मी को शांत करने में काफी हद तक मदद मिल सकती है।


Wednesday, April 8, 2026

7 Habits , जो आपको बना सकता है Successful

Habit 1 : Be Proactive / प्रोएक्टिव बनिए

Proactive होने का मतलब है कि अपनी life के लिए खुद ज़िम्मेदार बनना। आप हर चीज के लिए अपने parents  या  grandparents  को नही blame कर सकते। Proactive  लोग इस बात को समझते हैं कि वो “response-able” हैं। वो अपने आचरण के लिए जेनेटिक्स, परिस्थितियों, या परिवेष को दोष नहीं देते हैं। उन्हें पता होता है कि वो अपना व्यवहार खुद चुनते हैं। वहीँ दूसरी तरफ जो लोग reactive होते हैं वो ज्यादातर अपने भौतिक वातावरण से प्रभावित होते हैं। वो अपने behaviour के लिए बाहरी चीजों को दोष देते हैं। अगर मौसम अच्छा है, तो उन्हें अच्छा लगता है। और अगर नहीं है तो यह उनके attitude और performance को प्रभावित करता है, और वो मौसम को दोष देते हैं।

सभी बाहरी ताकतें एक उत्तेजना  की तरह काम करती हैं, जिन पर हम react करते हैं।इसी उत्तेजना और आप उसपर जो प्रतिक्रिया करते हैं के बीच में आपकी सबसे बड़ी ताकत छिपी होती है- और वो होती है इस बात कि स्वतंत्रता कि आप  अपनी प्रतिक्रिया का चयन स्वयम कर सकते हैं। एक बेहद महत्त्वपूर्ण चीज होती है कि आप इस बात का चुनाव कर सकते हैं कि आप क्या बोलते हैं। आप जो भाषा प्रयोग करते हैं वो इस बात को indicate  करती है कि आप खुद को कैसे देखते हैं। एक proactive व्यक्ति proactive भाषा का प्रयोग करता है.–मैं कर सकता हूँ, मैं करूँगा, etc. एक reactive  व्यक्ति reactive  भाषा का प्रयोग करता है- मैं नहीं कर सकता, काश अगर ऐसा होता, etc. Reactive  लोग  सोचते हैं कि वो जो कहते और करते हैं उसके लिए वो खुद जिम्मेदार नहीं हैं- उनके पास कोई विकल्प नहीं है।

ऐसी परिस्थितियां जिन पर बिलकुल भी नहीं या थोड़ा-बहुत control किया जा सकता है, उसपर react या चिंता करने के बजाये proactive लोग अपना time और energy  ऐसी चीजों में लगाते हैं जिनको वो control कर सकें। हमारे सामने जो भी समस्याएं, चुनौतियां या अवसर होते हैं उन्हें हम दो क्षेत्रों में बाँट सकते हैं।

Proactive लोग अपना प्रयत्न Circle of Influence पर केन्द्रित करते हैं। वो ऐसी चीजों पर काम करते हैं जिनके बारे में वो कुछ कर सकते हैं: स्वास्थ्य, बच्चे, कार्य क्षेत्र कि समस्याएं. Reactive लोग अपना प्रयत्न Circle of Concern पर केन्द्रित करते हैं। देश पर ऋण, आतंकवाद, मौसम. इस बात कि जानकारी होना कि हम अपनी energy किन चीजों में खर्च करते हैं, Proactive बनने की दिशा में एक बड़ा कदम है।


Habit 2: Begin with the End in Mind  अंत को ध्यान में रख कर शुरुआत करें

तो आप बड़े होकर क्या बनना चाहते हैं? शायद यह सवाल थोड़ा अटपटा लगे, लेकिन आप इसके बारे में एक क्षण के लिए सोचिये। क्या आप अभी वो हैं जो आप बनना चाहते थे, जिसका सपना आपने देखा था, क्या आप वो कर रहे हैं जो आप हमेशा से करना चाहते थे। ईमानदारी से सोचिये. कई बार ऐसा होता है कि लोग खुद को ऐसी जीत हासिल करते हुए देखते हैं जो दरअसल खोखली होती है– ऐसी सफलता, जिसके बदले में उससे कहीं बड़ी चीजों को  गवाना पड़ा। यदि आपकी सीढ़ी सही दीवार पर नहीं लगी है तो आप जो भी कदम उठाते हैं वो आपको गलत जगह पर लेकर जाता है।

आपके imagination या  कल्पना  पर आधारित है– imagination, यानि आपकी वो क्षमता जो आपको अपने दिमाग में उन चीजों को दिखा सके जो आप अभी अपनी आँखों से नहीं देख सकते। यह इस सिधांत पर आधारित है कि हर एक चीज का निर्माण दो बार होता है. पहला mental creation, और दूसरा physical creation। जिस  तरह blue-print तैयार होने के बाद मकान बनता है, उसी प्रकार mental  creation होने के बाद ही physical creation होती है। अगर आप खुद  visualize नहीं करते हैं कि आप क्या हैं और क्या बनना चाहते हैं तो आप, आपकी life कैसी होगी इस बात का फैसला औरों पर और परिस्थितियों पर छोड़ देते हैं। Habit 2  इस बारे में है कि आप किस तरह से अपनी विशेषता को पहचानते हैं, और फिर अपनी personal, moral और ethical guidelines के अन्दर खुद को खुश रख सकते और पूर्ण कर सकते हैं। अंत को ध्यान में रख कर आरम्भ करने का अर्थ है, हर दिन, काम या project की शुरआत एक clear vision के साथ करना कि हमारी क्या दिशा और क्या मंजिल होनी चाहिए, और फिर proactively उस काम को पूर्ण करने में लग जाना।

Habit 2 को practice में लाने का सबसे अच्छा तरीका है कि अपना खुद का एक Personal Mission Statement बनाना। इसका फोकस इस बात पर होगा कि आप क्या बनना चाहते हैं और क्या करना चाहते हैं. ये success के लिए की गयी आपकी planning है। ये इस बात की पुष्टि करता है कि आप कौन हैं, आपके goals को focus  में रखता है, और आपके ideas को इस दुनिया में लाता है। आपका Mission Statement आपको अपनी ज़िन्दगी का leader बनाता है। आप अपना भाग्य खुद बनाते हैं, और जो सपने आपने देखे हैं उन्हें साकार करते हैं।


Habit 3 : Put First Things First प्राथमिक चीजों को वरीयता दें

एक balanced life जीने के लिए, आपको इस बात को समझना होगा कि आप इस ज़िन्दगी में हर एक चीज नहीं कर सकते. खुद को अपनी क्षमता से अधिक कामो में व्यस्त करने की ज़रुरत नहीं है। जब ज़रूरी हो तो “ना” कहने में मत हिचकिये, और फिर अपनी important priorities पर focus  कीजिये।

Habit 1  कहती है कि, ” आप in charge हैं। आप creator हैं”। Proactive होना आपकी अपनी choice है। Habit 2 पहले दिमाग में चीजों को visualize करने के बारे में है। अंत को ध्यान में रख कर शुरआत करना vision से सम्बंधित है। Habit 3 दूसरी creation, यानि  physical creation के बारे में है। इस habit में Habit 1 और Habit 2  का समागम होता है। और यह हर समय हर क्षण होता है। यह Time Management  से related कई प्रश्नों को  deal  करता है।

लेकिन यह सिर्फ इतना ही नहीं है। Habit 3  life management  के बारे में भी है—आपका purpose, values, roles, और priorities. “प्राथमिक चीजें” क्या हैं?  प्राथमिक चीजें वह हैं, जिसको आप व्यक्तिगत रूप से सबसे मूल्यवान मानते हों। यदि आप प्राथमिक कार्यों को तरजीह देने का मतलब है कि,आप अपना समय, अपनी उर्जा Habit 2  में अपने द्वारा set की गयीं priorities पर लगा रहे हैं।


Habit 4: Seek First to Understand, Then to Be Understood / पहले दूसरों को समझो फिर अपनी बात समझाओ

Communication लाइफ की सबसे ज़रूरी skill है। आप अपने कई साल पढना-लिखना और बोलना सीखने में लगा देते हैं। लेकिन सुनने का क्या है? आपको ऐसी कौन सी training मिली है, जो आपको दूसरों को सुनना सीखाती है, ताकि आप सामने वाले को सच-मुच अच्छे से समझ सकें? शायद कोई नहीं? क्यों?

अगर आप ज्यादातर लोगों की तरह हैं तो शायद आप भी पहले खुद आपनी बात समझाना चाहते होंगे। और ऐसा करने में आप दूसरे व्यक्ति को पूरी तरह ignore कर देते होंगे, ऐसा दिखाते होंगे कि आप सुन रहे हैं, पर दरअसल आप बस शब्दों को सुनते हैं पर उनके असली मतलब को पूरी तरह से miss कर जाते हैं।

 

Habit 5: Think Win-Win  हमेशा जीत के बारे में सोचें

Think Win-Win अच्छा होने के बारे में नहीं है, ना ही यह कोई short-cut है। यह character पर आधारित एक कोड है जो आपको बाकी लोगों से interact और सहयोग करने के लिए है।

हम मे से ज्यादातर लोग अपना मुल्यांकन दूसरों से comparison और competition के आधार पर करते हैं। हम अपनी सफलता दूसरों की असफलता में देखते हैं—यानि अगर मैं जीता, तो तुम हारे, तुम जीते तो मैं हारा। इस तरह life एक zero-sum game बन जाती है। मानो एक ही रोटी हो, और अगर दूसरा बड़ा हिस्सा ले लेता है तो मुझे कम मिलेगा, और मेरी कोशिश होगी कि दूसरा अधिक ना पाए. हम सभी ये game खेलते हैं, लेकिन आप ही सोचिये कि इसमें कितना मज़ा है?

Win -Win ज़िन्दगी को co-operation की तरह देखती है, competition की तरह नहीं। Win-Win दिल और दिमाग की ऐसी स्थिति है जो हमें लगातार सभी का हित सोचने के लिए प्रेरित करती है। Win-Win का अर्थ है ऐसे समझौते और समाधान जो सभी के लिए लाभप्रद और संतोषजनक हैं। इसमें सभी चीजें खाने को मिलती हैं, और वो काफी अच्छा taste करती हैं।

एक व्यक्ति या संगठन जो Win-Win attitude के साथ समस्याओं को हल करने की कोशिश करता है उसके अन्दर तीन मुख्य बातें होती हैं।

* Integrity / वफादारी: अपने values, commitments और feelings के साथ समझौता ना करना।

* Maturity / परिपक्वता:  अपने ideas और feelings को साहस के साथ दूसरों के सामने रखना और दूसरों के विचारों और भावनाओं की भी कद्र करना।

* Abundance Mentality / प्रचुरता की मानसिकता: इस बात में यकीन रखना की सभी के लिए बहुत कुछ है।

बहुत लोग either-or के terms में सोचते हैं। या तो आप अच्छे हैं या आप सख्त हैं. Win-Win में दोनों की आवश्यकता होती है। यह साहस और सूझबूझ के बीच balance करने जैसा है. Win-Win को अपनाने के लिए आपको सिर्फ सहानभूतिपूर्ण ही नहीं बल्कि आत्मविश्वास से लबरेज़ भी होना होगा। आपको सिर्फ विचारशील और संवेदनशील ही नहीं बल्कि बहादुर भी होना होगा. ऐसा करना कि –courage और consideration में balance  स्थापित हो, यही real maturity है, और Win-Win के लिए बेहद ज़रूरी है।