Tuesday, May 5, 2026

पैरों में जलन या झुनझुनी क्यों होता है?


 इसमें हाथों और पैरों में जलन या झुनझुनी होती हैजिससे कमजोरीदर्द और सुन्नपन महसूस होता है। इस परेशानी को कम करने के लिए आप कुछ घरेलू नुस्खों का सहारा ले सकते हैं।

क्या आप सुबह उठते ही अपने पैरों में झुनझुनी महसूस करते हैं या लंबे समय तक बैठने या खड़े रहने से आपको परेशानी होती है? क्या जब आप पैर मोड़कर बैठते हैं, तो आपको पैरों में झुनझुनी महसूस होती है? अगर हां, एक बार डॉक्टर से संपर्क करें। पैरों में झुनझुनी या सुई जैसा चुभन महसूस होने की स्थिति को मेडिकल भाषा में पैरास्थीसिया कहते हैं।

किन कारणों से पैरों में झुनझुनी होती है?


  1. विटामिन B12 की कमी से नसें कमजोर होने लगती हैं, जिसकी वजह से  झुनझुनी हो सकती है।

  2. पैरों में नस दबने के कारण आपको झुनझुनी जैसा फील हो सकता है।
  3. ब्लड सर्कुलेशन ठीक होने से ऑक्सीजन नसों तक नहीं पहुंचती, जिसकी वजह से झुनझुनी जैसा फील हो सकता है।


  4. काफी ज्यादा शराब के सेवन से नर्व्स टिशूज डैमेज हो सकते हैं, जिसकी वजह से झुनझुनी महसूस हो हो सकता है।
  5. बहुत देर तक पैर मोड़कर या एक ही मुद्रा में बैठने से भी पैरों में झुनझुनी की परेशानी हो सकती है।

  • पैरों में झुनझुनी को एप्सम सॉल्ट की मदद से कम कर सकते हैं।
  • शरीर में विटामिन बी12 कम होने से झुनझुनी की समस्या हो सकती है।
  • झुनझुनी होने पर पैरों में गर्म सिंकाई की जा सकती है।

एप्पल साइडर विनेगर से पैरों की झुनझुनी होगी कम

एप्सम सॉल्ट में मैग्नीशियम की अच्छी खासी मात्रा होती है, जो शरीर में होने वाली सूजन को कम करने में मददगारसाबित हो सकता है।यह उन प्रभावित और सूजी हुई नसों को ठीक करने का काम करती है, जिसकी वजह से झनझनाहट महसूस होती है।


इसका इस्तेमाल करने के लिए पानी से भरे एक टब में एक कप एप्सम सॉल्ट डालें, लगभग 15-20 मिनट तक उस टब में बैठें। ब्लड सर्कुलेशन को बेहतर बनाने और झनझनाहट को कम करने के लिए यह काफी असरदार उपाय हो सकता है।

पैरों में होने वाली झुनझुनी की परेशानी को दूर करने के लिए आप एप्पल साइडर विनेगर का प्रयोग कर सकते हैं। इसमें शक्तिशाली एंटी-इंफ्लेमेटरी प्रभाव और एसिटिक एसिड गुण होते हैं, जो खराब हो चुकी नसों को ठीक करने और उनकी मरम्मत करने में मदद करती है।

झुनझुनी की परेशानी को दूर करने के लिए आप इसका प्रयोग कर सकते हैं। इसका प्रयोग करने के लिए एक गिलास गुनगुना पानी लें। इसमें 1 चम्मच एप्पल साइडर विनेगर डालें। अब इसे अच्छी तरह मिलाएं और थोड़ा सा शहद मिक्स कर लें। इसके बाद इस पानी को रोजाना पिएं। इससे पैरों और हाथो की कमजोरी दूर हो सकती है, जो झुनझुनी की समस्याओं को दूर करने में प्रभावी हो सकता है।


गर्म सिकाई से पैरों की झुनझुनी हो सकती है कम

हाथों और पैरों में होने वाली झुनझुनी की परेशानी को दूर करने के लिए गर्म सिंकाई करें। इससे पैरों में ब्लड सर्कुलेशन अच्छा हो सकता है। इससे ब्लड सर्कुलेशन बढ़ता है, जो नसों की कार्यक्षमता में सुधार होता है और झनझनाहट की समस्या के इलाज में मदद मिलती है।


एक गर्म कपड़ा लें और उसे प्रभावित हिस्सों पर 5-7 मिनट तक रखें। दर्द और झनझनाहट से राहत पाने के लिए इस प्रक्रिया को दिन में तीन बार दोहराएं।


Sunday, May 3, 2026

सर्दियों में बवासीर क्यों दर्द करता है .... जाने

कहा जाता है कि सर्दियों का मौसम अलग-अलग तरह की बीमारियां लेकर आता है, जिसमें सर्दी-जुकाम तो है ही साथ में जोड़ों में दर्द व स्किन से जुड़ी कुछ बीमारियां भी शामिल हैं। लेकिन इन सब के अलावा सर्दियां ऐसा मौसम हैं, जिसके दौरान ज्यादातर बीमारियां गंभीर बन जाती हैं और इनमें बवासीर की समस्या भी एक है। देखा गया है कि बवासीर के मरीजों को सर्दियों में ज्यादा परेशानियों का सामना करना पड़ता है। सर्दियों के मौसम में कई ऐसे कारण हैं, जिनसे बवासीर की समस्या बढ़ने लगती है

सर्दियों में बवासीर


ठंड के मौसम में बवासीर के मरीजों के लिए परेशानी बढ़ जाती है और दर्द ज्यादा रहने लगता है। उसके पीछे का एक कारण ठंडे मौसम के कारण त्वचा में हुई अकड़न होती है। वहीं सर्दियों में लोग ज्यादा फैट व शुगर वाला खाना खाते हैं और तला-भूना भी ज्यादा खाते हैं जिसके कारण कब्ज बढ़ती है और उसका सीधा असर बवासीर पर पड़ता है। सर्दियों के मौसम में धूप कम निकलती है और लोग फलों व सब्जियों का सेवन भी कम करते हैं, जिसके कारण इम्यूनिटी कमजोर पड़ने लगती है और इसके कारण बवासीर का घाव जल्दी नहीं भर पाता है और दर्द बढ़ता रहता है।

दर्द को कैसे कम करें


सबसे पहले जितना हो सके बवासीर के आसपास की त्वचा को ठंड के कारण अकड़ने न दें और खासतौर पर मल त्याग से पहले थोड़ी देर गर्म पानी में बैठें। इसके अलावा अपनी डाइट का खास ध्यान रखें ज्यादा फलों व सब्जियों को अपनी डाइट में शामिल करें ताकि आपको पर्याप्त फाइबर मिलता रहे जो कब्ज को दूर रखेगा और साथ ही अन्य जरूरी पोषक तत्व मिलते रहें जो आपकी इम्यूनिटी को मजबूत रखेंगे। इसके अलावा तला-भुना, ज्यादा फैट या शुगर वाला खाना न खाएं जो बवासीर के घाव को और ज्यादा बढ़ता है।

समय-समय पर ट्रीटमेंट जरूरी


उसे बढ़ने से पहले ही डॉक्टर के संपर्क में बने रहना चाहिए, समय-समय पर डॉक्टर से जांच कराते रहें। डॉक्टर के द्वारा दी गई दवाएं नियमित समय पर लेते रहें। डॉक्टर खाने की दवाओं के साथ-साथ लगाने की दवाएं भी दे सकते हैं, जिनका डॉक्टर की सलाह के अनुसार नियमित रूप से इस्तेमाल करना जरूरी है। इसके अलावा अगर आपको कुछ असाधारण लक्षण दिखते हैं जैसे अचानक से दर्द होने लगना, खुजली, जलन या सूजन जैसा महसूस होना या फिर मल में खून आने लगना आदि को ऐसे में डॉक्टर से बात कर लेनी चाहिए।


Saturday, May 2, 2026

एक रुपये के इस पत्ते से से जोड़ो का दर्द करे दूर

यूरिक एसिड की समस्या को दूर करने के लिए आप दवाइयों का सेवन कर सकते हैं, लेकिन एक चीज है, जो काफी सस्ती और नेचुरल होती है और शरीर के यूरिक एसिड को दूर करने में बेहद कारगर मानी जाती है। हम बात कर रहे हैं पान के पत्ते की, जो औषधीय गुणों से भरपूर होता है। 


किडनी अपना काम ठीक से नहीं कर पाती हैं, तो शरीर में यूरिक एसिड बढ़ने लगता है। दरअसल, यूरिक एसिड शरीर में प्यूरीन के टूटने पर बनता है, जो ज्यादातर किडनी द्वारा पेशाब के रूप में बाहर निकल जाता है। हालांकि, जब किडनी की कार्यक्षमता प्रभावित होती है या फिर शरीर में बहुत ज्यादा यूरिक एसिड बनने लगता है, तो यह पूरी तरह से शरीर से बाहर नहीं निकल पाता है। ऐसे में बढ़ा हुआ यूरिक एसिड कई समस्याओं का कारण बनता है। दरअसल, जब शरीर में यूरिक एसिड जमा होने लगता है, तो इससे जोड़ों में दर्द, गठिया और सूजन जैसी समस्याएं होने लगती हैं।

यूरिक एसिड को कम करता है पान का पत्ता?


बता दें कि पान के पत्तों में नेचुरल डिटॉक्सिफाइंग गुण होते हैं, जो किडनी की कार्यक्षमता को सुधारते हैं। ऐसे में यूरिक एसिड शरीर में जमा नहीं हो पाता और पेशाब के रूप में शरीर से बाहर निकल जाता है। इसके अलावा, इसमें पॉलीफेनोल्स और अन्य बायोएक्टिव यौगिक भी होते हैं, साथ ही यह एंटी-इंफ्लेमेटरी गुणों से भी भरपूर होता है, जो यूरिक एसिड की वजह से शरीर में होने वाली सूजन को कम करने का काम करता है। दरअसल, जब शरीर में यूरिक एसिड जमा होने लगता है, तो सूजन के साथ-साथ शरीर में दर्द भी रहने लगता है, पान में मौजूद गुण इस दर्द को भी दूर करते हैं।

यूरिक एसिड के लेवल को करे कंट्रोल


बता दें कि पान के पत्ते में कैरोटीनॉयड और फ्लेवोनॉयड्स ऑक्सीडेटिव होते हैं। यह स्ट्रेस को कम कर मुड को हल्का बनाने का काम करते हैं। इससे यूरिक एसिड के लेवल को कंट्रोल करने में काफी सहायता मिलती है।

पान के पत्ते का सेवन करने का तरीका

वैसे तो पान को नॉर्मली लोग चूना-कत्था लगाकर ही खाते हैं। हालांकि, इसे आप अपने स्वाद और सुविधा के अनुसार खा सकते हैं। हालांकि, यूरिक एसिड को कम करने के लिए आप इसे सादा ही चबा सकते हैं। आप पान को इन निम्न तरीकों से खा सकते हैं

पान का पानी

अगर आप पान के पत्तों को नहीं चबा सकते हैं, तो आप एक या दो पान के पत्तों को रातभर एक गिलास पानी में भिगो दें। फिर सुबह को उसी पानी को छानकर पी लें। पत्तों को पानी से निकाल लें। आप चाहें तो पानी को पान सहित पकाकर भी पी सकते हैं।

  • यूरिक एसिड को कंट्रोल करने के लिए पान के पत्तों का पानी फायदेमंद हो सकता है।
  • चूना और कत्थे के वगैर पान के पत्तों को चबाना फायदेमंद है।
  • यूरिक एसिड के कारण जोड़ों में काफी तेज दर्द हो सकता है।

सादा चबाना


अगर आपको यूरिक एसिड की समस्या लगातार बढ़ रही है, तो आप रोजाना दो पान के पत्तों का सेवन कर सकते हैं। इसके लिए दो सादे पान के पत्ते लें और औऱ उन्हें बिना किसी चूना-कत्थे के ऐसे ही चबा लें। फायदा होगा।


Thursday, April 30, 2026

पॉल्यूशन में खुद को बीमार होने से कैसे बचाएं?

ऐसे में हम में से कई लोग जुकाम, खांसीआंखों में जलन, सांस लेने में परेशानी और गले के इंफेक्शन जैसी समस्याओं से परेशान हैं। यह सब चीजें पॉल्यूशन की वजह से हो रही हैं, लेकिन आप इनसे खुद भी बच सकते हैं और अपने परिवार वालों को भी बचा सकते हैं।


आज हम आपको ऐसे ही 3 असरदार नुस्खों के बारे में बताने वाले हैं जो पॉल्यूशन और हवा में बढ़ती ठंड के कारण होने वाले बीमारियों से आपको बचाने में मदद करेंगे। 

डाइट में रखें न कोई भी कमी

जी हांआप शरीर हेल्दी तब रहता है जब आप उसे पोषण दे रहे होते हैंवरना अगर शरीर जब पोषण नहीं मिलता है तो वह जल्दी-जल्दी बीमार होने लगता है। इसलिए आप बाहर का खाने के बजाय घर का हेल्दी खाना खाएं और फ्रूट्स का सेवन करें। साथ ही समय समय पर नट्स और जूस भी पीते रहें।


  • शरीर में पोषण की कमी से हम जल्दी बीमार हो जाते हैं।
  • पॉल्यूशन से होने वाली बीमारियों से बचने का तरीका है कि आप इम्यूनिटी को बूस्ट करें।
  • इम्यूनिटी को बूस्ट करने के लिए कच्ची हल्दीतुलसीकाढ़ा आदि का सहारा लें।

अर्जुन की छाल का काढा


अर्जुन की छाल में एक नहीं बल्कि कई पोषक तत्व पाए जाते हैंजैसे कि टैनिनफाइटोकेमिकल्सफ्लेवोनोइड्स आदि। यह सभी इम्यूनिटी को बूस्ट करने के साथ-साथ हाई ब्लड प्रेशर को कंट्रोल करनेहार्ट को हेल्दी रखने और गट को क्लीन करने में मदद करते हैं। आप रोजाना अदरकतुलसीकाली मिर्च और अर्जुन की छाल को पानी में उबालकर पाल्यूशन से बचने वाला काढा बना सकते हैं।

रोज पीना शुरू करें कच्ची हल्दी और तुलसी की चाय


आप खुद को हेल्दी रखने के लिए और पॉल्यूशन के कारण होने वाली बीमारियों से खुद को बचाने के लिए कच्ची हल्दी और तुलसी की चाय पी सकते हैं। एक ओर जहां कच्ची हल्दी में एंटीबैक्टीरियल, एंटीफंगल, एंटीसेप्टिक और करक्यूमिन, बीटा-कैरोटीन, एस्कॉर्बिक एसिड, कैल्शियम, फाइबर, आयरन, जिंक, पोटेशियम और फ्लेवोनोइड्स जैसे पोषक तत्व पाए जाते हैं। 

तो वहीं तुलसी में कूलिंग एजेंट, विटामिन सी, , के और बी-कॉम्प्लेक्स जैसे विटामिन्स, कैल्शियम, आयरन और जिंक जैसे खनिज व एंटीऑक्सीडेंट, सूजन-रोधी, तनाव कम करने और पाचन में सुधार करने वाले तत्व भी पाए जाते हैं जो हमारी सेहत के लिए बहुत ही ज्यादा फायदेमंद होते हैं। यह इम्यूनिटी को तेजी से बूस्ट करने और हमें जल्दी बीमार होने से रोकते हैं। 

कैसे बनाएं तुलसी और कच्ची हल्दी की चाय


आप 1 गिलास पानी को पैन में डालकर गैस में चढ़ा दें और उसमें 1 इंच करीब कच्ची हल्दी का टुकड़ा लें और 5-6 तुलसी की पत्तियां डालकर अच्छे से पका लें। जब पानी आधा गिलास जितना रह जाए तो गैस बंद कर दें और इसे धीरे-धीरे पिएं। ये आम सी चाय आपकी इम्यूनिटी को बूस्ट करने और बीमारियों को दूर रखने में मदद करेंगी।