पिछले कुछ वर्षों से दुनियाभर में योग की लोकप्रियता काफी बढ़ी है। कुछ लोग इसके आसनों को शरीर की लचीलता और शक्ति बढ़ाने के लिए करते हैं, जबकि अन्य लोग मानसिक तनाव और चिंता जैसे विकारों को दूर करने के लिए योग अपनाते हैं।
योग के सबसे मुख्य घटक आसन और सांस लेने की विशेष तकनीक होती है। योग के आसनों को योगासन कहा जाता है, जो विशेष शारीरिक मुद्राएं होती हैं। ये शारीरिक मुद्राएं या योगासन कुछ इस तरीके से तैयार किए जाते हैं, जिनका नियमित रूप से अभ्यास करने पर इनसे शरीर में लचीलापन और शक्ति बढ़ती है।
योग एक प्रकार की प्राचीन शारीरिक व मानसिक क्रिया है। इसमें शरीर की लचीलता, शक्ति और सांस लेने की प्रक्रिया पर विशेष रूप से ध्यान केंद्रित करते हुए मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य में सुधार किया जाता है।
योग का इतिहास
योग का सबसे पहला उल्लेख भारत के सबसे प्राचीन ग्रंथों में से एक “ऋगवेद” में देखने को मिलता है। प्राचीन संग्रहों के अनुसार “योग” शब्द संस्कृत शब्द “युज” से निकला है, जिसका मतलब “मिलना” या “जुड़ना” है।
योग के प्रकार
योग के कई अलग-अलग प्रकार हैं, जिन्हें लोग अपनी शारीरिक फिटनेस और लक्ष्य के अनुसार चुनते हैं। इनमें निम्न शामिल हैं -
आज के समय में योग की प्रभावशीलता अधिकतर उसके आसनों पर ही निर्भर करती है, जिसमें व्यायाम, शक्ति, फुर्तीलापन और सांस लेने की तकनीक पर ध्यान दिया जाता है। योगासनों के अलग-अलग प्रकार मानसिक और शारीरिक क्रियाओं पर प्रभाव डालते हैं।जबकि योग की अधिकांश शैलियों में ध्यान और श्वास शामिल है, कृपालु योग मन, शरीर और आत्मा पर समान महत्व रखता है। यह शुरुआती लोगों के लिए आदर्श है और आपकी उम्र, क्षमता, आकार या अन्य परिस्थितियों से कोई फर्क नहीं पड़ता, हर किसी के लिए स्वीकार्य और अनुकूल है।
कई लोगों के लिए, कृपालु योग अपने दैनिक जीवन में फैलता है और यह महान आध्यात्मिक और मानसिक परिवर्तन के साथ-साथ शारीरिक स्वास्थ्य का स्रोत भी हो सकता है।
कुण्डलिनी योग -
- कुंडलिनी योग मुद्रा आपके दिमाग को शांत करने और आपको अधिक आत्म-जागरूक बनाने में मदद करती है
- बेहतर मूड और कम तनाव कुंडलिनी योग के सामान्य लाभ हैं
- योगाभ्यास का अधिकतम लाभ उठाने के लिए निरंतर अभ्यास महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है
कुंडलिनी आपकी रीढ़ के नीचे स्थित अप्रयुक्त ऊर्जा है [1]। कुंडलिनी योग की मदद से, आप सात चक्रों को खोलकर इस अप्रयुक्त ऊर्जा को मुक्त कर सकते हैं। आपके पूरे शरीर में इस ऊर्जा के मुक्त प्रवाह के परिणामस्वरूप, आप तरोताजा और तरोताजा महसूस कर सकते हैं।
इस शैली कीnयोग लाभ बूढ़े और युवा दोनों अभ्यासी। कुंडलिनी योग मुद्राएं आंदोलनों, ध्यान, श्वास और जप का एक संयोजन हैं। कुंडलिनी योग का लक्ष्य आपकी चेतना और आत्म-जागरूकता के स्तर को बढ़ाते हुए शरीर को मजबूत और अधिक ऊर्जावान बनाना है।
कुंडलिनी योग के लाभ
चिंता और तनाव से राहत
- कुंडलिनी योग, अन्य प्रकार के योगों की तरह, तनाव और चिंता को कम करने में सहायता कर सकता है।
- 2017 के एक संक्षिप्त अध्ययन में प्रतिभागियों ने बताया कि कुंडलिनी योग करने के बाद उन्हें तुरंत कम तनाव महसूस हुआ। तीन अतिरिक्त महीनों के अभ्यास के बाद भी यह प्रभाव बना रहा।
- इसी तरह के निष्कर्ष 2018 के एक अध्ययन में पाए गए जिसमें पाया गया कि आठ सप्ताह के कुंडलिनी योग अभ्यास के बाद प्रतिभागियों की चिंता का स्तर कम हो गया। अध्ययन के निष्कर्षों के अनुसार, सामान्यीकृत चिंता विकार से पीड़ित लोगों के लिए कुंडलिनी योग एक उपयोगी उपचार हो सकता है।
इस मुद्रा का उपयोग मन को शांत करने और मानसिक एवं शारीरिक स्वास्थ्य को बढ़ावा देने के लिए किया जाता है। यह मुद्रा स्त्रीत्व से जुड़ी हुई है क्योंकि इसका श्रोणि क्षेत्र पर सकारात्मक प्रभाव पड़ता है।
यह मुद्रा यह तंत्रिका तंत्र को शांत करता है और मस्तिष्क की मांसपेशियों को आराम देता है। मुद्रा यह बहुत अच्छा है तनाव, चिंता, घबराहट और नींद संबंधी विकार।.
यह मुद्रा हमारी आंतरिक शक्ति और मानसिक सामर्थ्य को बढ़ाने में मदद करती है, जिससे हम मानसिक और शारीरिक रूप से अधिक स्थिर हो जाते हैं।
शिवानंद योग -
योग के इस प्रकार के अनुसार श्वास, विश्राम, आहार, व्यायाम और सकारात्मक सोच एक साथ मिलकर काम करती है, जिसे जीवनशैली में सुधार होता है। शिवानंद योग में 12 प्रकार के सामान्य योगासन किए जाते हैं, जिन्हें सूर्य नमस्कार से शुरू किया जाता है।
यिन योग -
इस योग में लंबे समय तक शरीर को निष्क्रिय मुद्रा रखकर अपना ध्यान केंद्रित किया जाता है। यिन योग में धीमी गति की गतिविधियां होती हैं और इसे पारंपरिक चीनी चिकित्सा प्रणाली को भी जोड़ा गया है। योग का यह प्रकार गहरे ऊतकों, लिगामेंट, जोड़ और हड्डियों के लिए काम करता है।
विनियोग -
विनियोग
एक संस्कृत शब्द है, जिसका मतलब किसी भी चीज
को उचित रूप से लागू करना या प्रयोग में लाना है। यह एक विशेष अनुशासन प्रणाली है, जो शरीर, श्वास, मन, व्यवहार, भावनाओं और प्राणों को आपस में जोड़ती है।
योग के लाभ
योग के
परिणामों व उसकी प्रभावशीलता की गुणवत्ता पर कई शोध हो चुके हैं। इनमें से अधिकतर
शोधों में पाया गया कि योग शारीरिक गतिविधि, लचीलता और संतुलन बढ़ाने और
शक्ती प्रदान करने का एक असरकारक तरीका है। यहां तक कि कुछ शोधों में यह भी पाया
गया है कि उच्च रक्तचाप, हृदय रोग व मानसिक रोगों के मरीजों के लिए योग काफी लाभदायक
है। योग से मिलने वाले मुख्य लाभों के बारे में निम्न बताया गया है -
- शारीरिक शक्ति, लचीलता और संतुलन में सुधार -
योगासन के दौरान धीमी गति में शारीरिक गतिविधियां करते समय गहरी सांस लेने से रक्त का प्रवाह बढ़ता है और मांसपेशियां भी सक्रिय हो जाती हैं। ठीक इसी प्रकार योगासन के दौरान धारण की गई मुद्रा से शारीरिक शक्ति का विकास होता है।
- कमर व जोड़ों के दर्द से राहत -
कमर में होने वाले दर्द को कम करने के लिए कई योगासन काफी लाभदायक रहते हैं। योग की मदद से न सिर्फ दर्द को कम करने में मदद मिलती है, इससे प्रभावित हिस्से की गतिशीलता में भी सुधार होता है। अमेरिका के कुछ मेडिकल कॉलेजों ने योग को कमर दर्द के लिए शुरुआती उपचार सुझाया है।
- गठिया के लक्षणों को कम करना -
गठिया में होने वाले दर्द व जोड़ों की समस्याओं को कुछ योगासनों की मदद से कम किया जा सकता है। कुछ शोधों में योगासन को गठिया के लिए काफी प्रभावी बताया गया है।
- हृदय स्वास्थ्य के लिए लाभकारी -
नियमित रूप से योग करने से शारीरिक तनाव का स्तर कम होता है और साथ ही शरीर के अंदर होने वाली सूजन व लालिमा कम हो जाती है, जिसके परिणामस्वरूप हृदय के स्वास्थ्य को बनाए रखने में मदद मिलती है। हृदय संबंधी रोगों का कारण बनने वाले कुछ कारक जैसे उच्च रक्तचाप और मोटापा आदि को भी योग अपनाकर कम किया जा सकता है।
- शरीर को विश्राम मिलता है और नींद अच्छी आती है -
कुछ अध्ययन बताते हैं, कि रोजाना शाम के समय योग करने से आप शारीरिक व मानसिक रूप से नींद के लिए तैयार हो जाते हैं और परिणामस्वरूप आप अच्छी नींद ले पाते हैं।
- शरीर को अधिक ऊर्जा मिलती है और अच्छा मूड रहता है -
रोजाना उचित योगासन करने से मानसिक व शारीरिक ऊर्जा का विस्तार होता है। इससे सतर्कता और उत्साह जैसी भावनाएं बढ़ जाती हैं और नकारात्मक भावनाएं कम हो जाती हैं।
- तनाव कम रहता है -
नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ के अनुसार कुछ वैज्ञानिक प्रमाण पाए गए जो बताते हैं कि योग की मदद से मानसिक स्वास्थ्य में सुधार होता है, अच्छी नींद आती है और शारीरिक वजन कम करने में मदद मिलती है, जिसके परिणामस्वरूप शारीरिक व मानसिक तनाव भी कम रहता है।
- आत्म देखभाल भावना का विस्तार होता है -
कई शोध परिणामों से पता चलता है कि रोजाना योगाभ्यास करने वाले व्यक्ति स्वंय शारीरिक देखभाल पर विशेष ध्यान देते हैं। योग करने वाले व्यक्ति अपनी डाईट, नींद और साफ-सफाई को संतुलित रखते हैं।
इतना ही नहीं
योग अपनाने से मिलने वाले लाभ हर व्यक्ति व उनके स्वास्थ्य के अनुसार अलग-अलग रहते
हैं। इससे मिलने वाले लाभ व प्रभावशीलता को देखते हुए दुनियाभर इसकी लोकप्रियता
काफी बढ़ गई थी। साथ ही योगा क्लास में हिस्सा लेने से आपको सहायक समुदाय से
जुड़ने के मौका मिलता है, जिससे आपको मानसिक परेशानियों से उभरने में मदद मिलती है।
क्या करें -
- योगाभ्यास
करने से पहले अपने शरीर, मन और आसपास साफ-सफाई करना जरूरी है।
- योगासनों
को खाली पेट किया जाना चाहिए। यदि आपको कमजोरी महसूस हो तो गुनगुने पानी में
थोड़ा सा शहद डाल कर पी सकते हैं।
- कोई भी
योगासन शुरू करने से पहले मूत्राशय और आंते खाली होनी चाहिए। इसलिए पहले ही
पेशाब व मल त्याग दें।
- योग शुरु
करने से पहले प्रार्थना व वंदना करें, ऐसा करने से मस्तिष्क
में अच्छे विचार आते हैं और आपको योग करने के लिए मानसिक रूप से तैयार होने
में मदद मिलती है।
- योगिक
क्रियाओं को सामान्य रूप से सांस लेते हुए और पूरी सतर्कता व ध्यान के साथ
किया जाना चाहिए। क्रियाओं को धीरे-धीरे और आराम से शुरू करें।
- कोई भी
आसन शुरू करने से पहले स्ट्रेचिंग एक्सरसाइज और वॉर्म-अप कर लें, ऐसा करने
से योग करते समय मांसपेशियां क्षतिग्रस्त नहीं होती हैं।
- किसी आसन
को पहली बार करने से पहले उसका अच्छे से अभ्यास कर लें और यह सुनिश्चित कर
लें कि आप सही मुद्रा और तकनीक का इस्तेमाल कर रहे हैं।
- यदि संभव
हो तो आपने आहार को सात्विक रखें, जिनमें मीट, अंडे, प्याज,
लहसुन और मशरूम से परहेज किया जाता है।
- रोजाना
पर्याप्त मात्रा में पानी पिएं ताकि शरीर में पानी की कमी न हो पाए।
- उचित व
आरामदायक कपड़े पहनें। इस दौरान आपको ढीले-ढाले सुती कपड़े पहने की सलाह दी
जाती है, ताकि योग मुद्राएं करते समय आपको किसी प्रकार की अड़चन
महसूस न हो।
- योगासन को
हमेशा एक साफ-सुथरी और हवादार जगह पर किया जाता है।
- योगासन
करने के लिए अच्छी ग्रिप वाले मैट का इस्तेमाल करें, ताकि आप शारीरिक
मुद्रा करते समय आप फिसलें नहीं।
- योगासन के
दौरान अपनी सांसों का विशेष ध्यान रखें, प्रशिक्षक के अनुसार
ही सांसें लें।
- जब तक
आपको प्रशिक्षक ऐसा करने के लिए न कहें, तब तक मुंह से सांस न
लें।
- शरीर को
शांत रखने के लिए योग की सभी विश्राम क्रियाओं को पूरा करें।
- कोई भी नई
मुद्रा बनाते समय गति का विशेष ध्यान रखें और किसी भी प्रकार का झटका लगने से
बचें।
- शारीरिक
क्षमता के अनुसार ही अभ्यास करें। यदि एक बार में मुद्रा सही न बन पाए तो
प्रशिक्षक की सलाह के अनुसार आप उसे फिर से कोशिश कर सकते हैं, धीरे-धीरे
आप वह मुद्रा बनाने में सफल हो जाएंगे।
- हर योगासन
करने की एक सीमित सीमा होती हैं, जिन्हें हमेशा ध्यान रखना चाहिए। सीमा के
स्तर से अधिक करने से स्थिति खतरनाक हो सकती है।
- योगासन का
सत्र ध्यान लगाते हुए, शांति और संकल्प के साथ समाप्त किया जाना चाहिए,
ताकि आपका मन पूरी तरह से शांत और लीन हो।
क्या न करें -
- योग करने
के 30 मिनट बाद तक भोजन करने, पानी पीने और नहाने से
परहेज करें।
- भोजन करने
के तुरंत बाद योगासन न करें, इसके लिए कम से कम 2 से 3 घंटे तक
प्रतीक्षा करनी जरूरी है।
- मासिक
धर्म के दौरान महिलाओं को योगासन नहीं करना चाहिए। हालांकि, इस दौरान
प्राणायम और अन्य विश्राम गतिविधियां की जा सकती हैं।
- यदि आपको
कोई शारीरिक समस्या है या फिर आप थकान महसूस कर रहे हैं, तो आपको
कोई भी योगासन नहीं करना चाहिए।
- योग को
शांति के साथ धीरे-धीरे किया जाता है, इसे जल्दबाजी में करने
की कोशिश न करें। जल्दबाजी में योग करने से स्वास्थ्य पर इसका नकारात्मक असर
पड़ सकता है।
- किसी
प्रकार की चोट, मोच, फ्रैक्चर या सर्जरी होने पर जब तक डॉक्टर अनुमति न दें
योगासन शुरू न करें।
- योग करने
से पहले या बाद में कोई भी अधिक मेहनत वाली एक्सरसाइज न करें।
- अत्यधिक
गर्मी, सर्दी या नमी वाले समय में योग न करें क्योंकि इस मौसम
में आप ध्यान नहीं लगा पाएंगे।
- अध्यात्मिक
और मानसिक शांति के लिए योग करने वाले लोगों को योग ग्रंथों के सभी नियमों का
पालन किए बिना योगासन नहीं करना चाहिए।
हालांकि,
यदि आपको
स्वास्थ्य संबंधी कोई भी समस्या है या फिर आपके मन में योग से संबंधित कोई भी
आशंका है, तो इस बारे में
डॉक्टर और योग प्रशिक्षक से बात कर लें।
















