बहुत समय पहले की बात है, एक घने जंगल के किनारे एक छोटी-सी पहाड़ी थी। उसी पहाड़ी पर मोहिनी नाम ( की एक समझदार और समझदार बकरी रहती थी। गंगा का जीवन बहुत सरल था—हर दिन वह ताज़ी घास चरती, पहाड़ी की ऊँची चोटियों पर उछलती-कूदती और रात होते ही अपनी गुफा में आराम करने चली जाती। उसकी तेज़ नजरें और चौकन्ने कान हर खतरे को भाँप लेते थे, इसलिए वह हमेशा सुरक्षित रहती थी।
धूर्त और भूखा भेड़िया
उसी जंगल में एक भेड़िया भी रहता था, जिसका नाम नागराज था। कालू बहुत चालाक और धूर्त था। उसकी आँखें हमेशा खाने की तलाश में लगी रहती थीं, और उसकी सबसे बड़ी इच्छा थी कि वह एक दिन मोहिनी को अपना शिकार बना ले। लेकिन मोहिनी की सतर्कता और तेज़ बुद्धि के कारण वह कभी भी अपने इरादों में कामयाब नहीं हो सका।
जब भेड़िये को मिला मौका
एक दिन नागराज ने देखा कि मोहिनी पहाड़ी के किनारे खड़ी होकर रसदार घास खा रही थी। पहाड़ी की ढलान बहुत तीव्र थी, और अगर मोहिनी ज़रा भी असावधान होती, तो नीचे गिर सकती थी। यह देखकर नागराज के मन में एक शैतानी योजना आई।
“अगर मैं इसे अचानक धक्का दे दूँ, तो यह पहाड़ी से लुड़क जाएगी और बेहोश हो जाएगी। फिर मैं इसे आसानी से खा सकता हूँ!” नागराज ने सोचा।
धीरे-धीरे, बिना कोई आवाज़ किए, वह
मोहिनी की ओर बढ़ने लगा।
मोहिनी की सतर्कता और बुद्धिमत्ता
मोहिनी ने अपनी तेज़ नजरों से नागराज को आते देख लिया। वह समझ गई कि नागराज का इरादा खतरनाक है। लेकिन मोहिनी डरने वाली नहीं थी। वह घबराने के बजाय जल्दी से एक योजना बनाने लगी।
मोहिनी ने अपनी चतुराई से मुस्कुराते हुए कहा, “अरे नागराज भैया, आप यहाँ कैसे? क्या आप भी घास चरने आए हैं?”
नागराज ने सोचा कि मोहिनी डर गई है, इसलिए वह ठहाका
लगाकर बोला, “नहीं मोहिनी, मैं तुम्हें खाने
आया हूँ! तुम्हारी मुस्कान देखकर तो और भी भूख लग रही है!”
मोहिनी की चालाक योजना
मोहिनी ने अपना डर छुपाते हुए कहा, “अच्छा,
अगर तुम मुझे खाना ही चाहते हो, तो खा सकते हो।
लेकिन मैंने सुना है कि तुम बहुत अच्छे गायक हो। क्या तुम मरने से पहले मुझे एक
मधुर गीत सुना सकते हो?”
नागराज को यह सुनकर बहुत खुशी हुई। वह सोचने लगा, “वाह!
यह बकरी तो मूर्ख निकली। इसे तो मरना ही है, तो क्यों न इसे
गाने से पहले थोड़ा और डराया जाए?”
भेड़िए की मूर्खता और बकरी की चालाकी
नागराज ने आँखें बंद कीं और ज़ोर-ज़ोर से गाने लगा। वह अपने ही संगीत
में इतना खो गया कि उसे यह भी ध्यान नहीं रहा कि वह पहाड़ी के बिलकुल किनारे खड़ा
है।
जैसे ही वह ऊँची आवाज़ में गाने लगा, उसके पैरों का संतुलन बिगड़ गया और वह सीधे नीचे खाई में गिर पड़ा। “धड़ाम!” एक ज़ोरदार आवाज़ आई, और नागराज नीचे गिरकर बुरी तरह घायल हो गया।
मोहिनी ने यह देखकर राहत की सांस ली और खुशी-खुशी अपनी गुफा की ओर दौड़
पड़ी।
नागराज की हार और पछतावा
नीचे गिरकर नागराज बहुत दर्द में था। वह कराहते हुए बोला, “काश!
मैंने अपनी धूर्तता के बजाय अपनी अक्ल का इस्तेमाल किया होता। यह बकरी मुझसे
ज़्यादा चतुर निकली!”
लेकिन अब पछताने का कोई फायदा नहीं था। मोहिनी अपनी बुद्धिमानी से अपनी जान बचा चुकी थी, और नागराज को अपनी गलती का अहसास हो चुका था।
सीख जो हमें इस कहानी से मिलती है...
- धूर्तता
और चालाकी से हमेशा जीत नहीं मिलती, बल्कि
समझदारी और सतर्कता ही असली ताकत होती है।
- संकट
में धैर्य और बुद्धिमानी से काम लें, तो
बड़ी से बड़ी मुसीबत से भी बचा जा सकता है।
- किसी
को कमजोर समझकर उसे धोखा देने की कोशिश करना हमेशा नुकसानदेह साबित होता है।







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