होटल जैसा आराम, जानें क्यों खास है भारत की पहली....
भारतीय रेलवे एक बार फिर रेल यात्रा की परिभाषा बदलने की तैयारी में है। देश की पहली वंदे भारत स्लीपर ट्रेन को लेकर आधिकारिक ऐलान हो चुका है। रेल, सूचना एवं प्रसारण तथा इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने नई दिल्ली स्थित रेल भवन में बैठक के दौरान जानकारी दी कि इस ट्रेन के सभी ट्रायल, टेस्टिंग और सर्टिफिकेशन सफलतापूर्वक पूरे कर लिए गए हैं। जनवरी महीने में ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस ऐतिहासिक ट्रेन को गुवाहाटी-हावड़ा रूट पर हरी झंडी दिखाएंगे। रेल मंत्री के मुताबिक यह प्रोजेक्ट न सिर्फ भारतीय रेलवे बल्कि देश के यात्रियों के लिए भी एक बड़ा मील का पत्थर है। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि साल 2026 भारतीय रेलवे के लिए सुधारों का साल होगा, जिसमें यात्रियों को केंद्र में रखकर कई बड़े फैसले लिए जाएंगे।
तो आइए, इसी बहाने जानते हैं वंदे भारत स्लीपर ट्रेन के बारे में।
वंदे भारत स्लीपर ट्रेन के बारे में:
- वंदे भारत स्लीपर ट्रेन, भारतीय रेलवे द्वारा विकसित एक सेमी-हाई-स्पीड स्वदेशी ट्रेन है, जिसे लंबी दूरी की रात्रिकालीन यात्रा के लिए डिजाइन किया गया है।
- इसे BEML (बेंगलुरु) और ICF (चेन्नई) द्वारा संयुक्त रूप से निर्मित किया गया है। यह पूरी तरह से ‘मेक इन इंडिया’ प्रोजेक्ट का हिस्सा है।
- परीक्षणों के दौरान इसने 180 किमी/घंटा की गति प्राप्त की है, जबकि इसका नियमित परिचालन 160 किमी/घंटा की रफ्तार पर होगा।
- यह 16 कोचों वाली एक ‘सेल्फ-प्रोपल्शन’ ट्रेनसेट है (इसमें अलग से इंजन की आवश्यकता नहीं होती)। इसमें 11 एसी 3-टियर, 4 एसी 2-टियर और 1 प्रथम श्रेणी एसी कोच शामिल हैं।
- इसके फर्स्ट एसी में शॉवर (नहाने की सुविधा), बायो-वैक्यूम शौचालय, सेंसर-आधारित नल, और ऊपरी बर्थ पर चढ़ने के लिए बेहतर सीढ़ियाँ दी गई हैं।
- यह ट्रेन लगभग 823 से 1,128 यात्रियों को ले जाने में सक्षम है।
- यह स्वदेशी रूप से विकसित ‘कवच’ (Kavach) ट्रेन सुरक्षा प्रणाली से लैस है, जो टक्कर रोकने में सक्षम है।
- इसमें EN-45545 HL3 अग्नि सुरक्षा मानकों का पालन करते हुए इसमें एरोसोल-आधारित आग बुझाने वाली प्रणालियाँ लगाई गई हैं।
वंदे भारत स्लीपर ट्रेन को खासतौर पर ओवरनाइट यात्रा के लिए डिजाइन किया गया है। यह एक सेमी-हाई-स्पीड ट्रेन है जिसकी डिजाइन स्पीड 180 किलोमीटर प्रति घंटा तक रखी गई है। रेलवे का उद्देश्य है कि ट्रेन शाम के समय अपने सोर्स स्टेशन से रवाना हो और अगली सुबह गंतव्य तक पहुंचे। इससे लंबी दूरी की यात्रा करने वाले यात्रियों का समय बचेगा और सफर अधिक सुविधाजनक होगा। यह ट्रेन असम और पश्चिम बंगाल के कई अहम जिलों को सीधे जोड़ती है। असम में कामरूप मेट्रोपॉलिटन और बोंगाईगांव जबकि पश्चिम बंगाल में कूचबिहार, जलपाईगुड़ी, मालदा, मुर्शिदाबाद, पूर्व बर्धमान, हुगली और हावड़ा जैसे जिलों को इससे सीधे फायदा मिलेगा। इससे नॉर्थ-ईस्ट और पूर्वी भारत की कनेक्टिविटी को नई मजबूती मिलने की उम्मीद है।
स्लीपर ट्रेन का आधुनिक रूप
वंदे भारत स्लीपर ट्रेन को पारंपरिक स्लीपर ट्रेनों से बिल्कुल अलग अनुभव देने के उद्देश्य से तैयार किया गया है। ट्रेन में कुल 16 कोच होंगे, जिनमें थ्री-टियर एसी, टू-टियर एसी और एक फर्स्ट क्लास एसी कोच शामिल है। लगभग 823 यात्रियों की क्षमता वाली इस ट्रेन में बर्थ को एर्गोनॉमिक डिजाइन के साथ तैयार किया गया है ताकि लंबी रात की यात्रा में भी शरीर पर कम दबाव पड़े। रेल मंत्री ने बताया कि ट्रेन के लिए पूरी तरह नया बोगी डिजाइन किया गया है, जिसमें नया सस्पेंशन सिस्टम लगाया गया है। इससे झटकों में कमी आएगी और शोर भी कम होगा। अंदरूनी सीढ़ियां और इंटीरियर भी इस तरह डिजाइन किए गए हैं कि यात्रियों को चलने-फिरने में आसानी हो और सुरक्षा बनी रहे।
आधुनिक तकनीक के साथ सुरक्षा
सुरक्षा के मोर्चे पर वंदे भारत स्लीपर ट्रेन को अत्याधुनिक तकनीकों से लैस किया गया है। इसमें कवच जैसी स्वदेशी ट्रेन सुरक्षा प्रणाली लगाई गई है, जो किसी और ट्रेन से टक्कर की आशंका को कम करती है। इसके अलावा सभी कोच में CCTV कैमरे लगाए गए हैं ताकि यात्रियों की सुरक्षा पर लगातार नजर रखी जा सके। आपात स्थिति में यात्री सीधे ट्रेन मैनेजर या लोको पायलट से संपर्क कर सकें, इसके लिए इमरजेंसी टॉक-बैक यूनिट दी गई है। साथ ही इलेक्ट्रिकल कैबिनेट और शौचालयों में एरोसोल बेस्ड फायर फायर डिटेक्शन और अग्निशमन सिस्टम लगाया गया है, जो आग लगने की स्थिति में तुरंत सक्रिय हो जाती है।
स्वच्छता, दिव्यांग सुविधा और आधुनिक ड्राइवर कैब
वंदे भारत स्लीपर ट्रेन में स्वच्छता को भी प्राथमिकता दी गई है। ट्रेन में डिसइंफेक्टेंट तकनीक का इस्तेमाल किया गया है ताकि उच्च स्तर की साफ-सफाई बनी रहे। दिव्यांग यात्रियों के लिए विशेष व्यवस्थाएं की गई हैं, जिससे यह ट्रेन अधिक समावेशी बन सके। ड्राइवर कैब को भी आधुनिक नियंत्रण और सुरक्षा प्रणालियों से लैस किया गया है। ट्रेन का बाहरी स्वरूप एरोडायनामिक रखा गया है और ऑटोमैटिक बाहरी दरवाजे लगाए गए हैं, जो सेफ्टी और एनर्जी एफिशिएंसी दोनों में मदद करते हैं।
हाल ही में भारत की पहली वंदे भारत स्लीपर ट्रेन की अंतिम उच्च-गति परीक्षण और रेलवे सुरक्षा आयुक्त (CRS) द्वारा प्रमाणन (certification) की प्रक्रिया सफलतापूर्वक पूरी कर हो चुकी है। यह विकास भारतीय रेलवे के आधुनिकीकरण और ‘आत्मनिर्भर भारत’ की दिशा में एक ऐतिहासिक मील का पत्थर है।
महत्व:
- आत्मनिर्भर भारत: यह पूरी तरह से भारत में डिजाइन और निर्मित है, जो वैश्विक रेल निर्माण बाजार में भारत की स्थिति को मजबूत करता है।
- समय की बचत: 160 किमी/घंटा की परिचालन गति के साथ, यह राजधानी एक्सप्रेस की तुलना में यात्रा समय में 15-20% की कटौती करेगी。
- आर्थिक गलियारा: बेहतर रेल कनेक्टिविटी से उत्तर-पूर्व और पूर्वी भारत के बीच व्यापार और पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा।
- ऊर्जा दक्षता: पुनर्योजी ब्रेकिंग (Regenerative Braking) प्रणाली के कारण यह ट्रेन कम बिजली की खपत करती है।
Reviewed by AdvanceTechnicalWriter.com
on
January 15, 2026
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