Thursday, September 25, 2025

लैपटॉप रिपेयर पार्ट 1 Voltage Require & Section Knowledge

 

Block Diagram of Laptop Motherboard

 

Figure –

 



Motherboard Components and Their Function


The main important parts of components of the motherboard are,

1. CPU


CPU stands for Central Processing Unit. It is the heart of the motherboard or the whole computer. It performs arithmetic operations such as addition, subtraction, division, and multiplication, and logical operations such as rotation, moves, and many others. The CPU does not communicate directly with the real world. There are so many peripheral and supporting devices connected to the input and output of the CPU.


2. Clock Generator


It is basically a pulse signal generation circuit. It generates a pulse signal and provides it to all the important devices of the motherboard such as the processor, RAM, and other devices. It makes synchronization between all the devices for communication, data transferring, etc. The speed of the clock generation is measured by Herth(Hz), Megahertz(MHz), or GigaHertz(GHz). All the components connected to the same pulse generator will work simultaneously with the same frequency.


3. Bus


Bus or Busbar is a pathway for data or signal transmission between different components of the motherboard. It is built with so many electrical conductors or conducting paths.


4. Chipset


It is built with different ICs, and devices that manage the data transmission between the processor and different components of the motherboard. Generally, the northbridge and southbridge chipset together are called the chipset.


5. Northbridge and SouthBridge


The northbridge and southbridge are the main two components of the chipset. The northbridge controls the memory units such as RAM, Processor, and the Accelerated Graphics Port(AGP). It is the controlling hub for the memory unit.

On the other hand, the southbridge controls all the Input/Output controls such as USB, IDE, SATA, Ethernet, Audio Codec, and other ports.


6. Slots


Slots are the arrangement for placing or interfacing different devices such as audio cards, RAM, graphics cards, network cards, modems, etc. Here, in the computer motherboard, you will see different types of slots such as PCI(Peripheral Component Interconnect) Slots, Graphic Card Slots, Memory Card Slots, etc. These slots help to connect and disconnect devices very easily.


7. RAM and ROM


RAM stands for Random Access Memory and ROM Stands for Read-Only Memory. RAM is a memory that is used during the program execution by the CPU. It is a temporary memory. CPU stores data temporarily in this RAM. On the other hand, ROM is a permanent memory. Once the data is stored in the ROM, it cannot be deleted. ROM is used to store the main program instructions, BIOS software, etc.


North Bridge = GMCH (Graphic Memory Controller Hub) / MCH

South Bridge = ICH (Input Output Controller Hu)

North + South Bridge = PCH (Platform Controller Hub)

 PCH + CPU inbuild = SOC (System On a Chip)

Graphic Chip = VRAM

 

पहचान

अगर लैपटॉप मदरबोर्ड मे चिप के ऊपर मेटल लगा हुआ चिप मिले तो वह नॉर्थ ब्रिज होगा।

और यदि मेटल लगे चिप के बगल मे ही 4 या 6 या 8 VRAM (काले रंग की आईसी की तरह ही दिखे) लगे मिले तो वह ग्राफिक चिप वाला मदरबोर्ड होगा।

 

·       यदि मदरबोर्ड आपका साउथ और नॉर्थ ब्रिज वाला मिले तो एक साउथ ब्रिज और एक नॉर्थ ब्रिज (जिस पर मेटल लगा हो) और एक CPU मिलेगा।

·       यदि PCH और ग्राफिक वाला बोर्ड होगा तो उसमे आपको एक ग्राफिक चिप (जिसके पास मे VRAM 2 या 4 या 6 या 8 मिल सकते है) और दूसरा आपको PCH चिप मिलेगा । जिस पर स्टील मेटल लगा होता है और तीसरा आपका CPU होगा ।

·       यदि नॉन ग्राफिक मदरबोर्ड होगा तो VRAM आपको PCH के बगल मे नहीं मिलेगा।

 

 Voltage Require

Figure

 

 


 

Note * PCH BIOS work store main setup (CMOS / BIOS setup)

·       EC BIOS work manage power management (ON)

·       EC BIOS inside Super IO. This is programmable IO)

 

पुराने लैपटॉप मे EC बाईओस हुआ करता था जो पावर को management करके super IO को भेजता था । तब जाकर सिस्टम ऑन होता था , लेकिन अब के मदरबोर्ड मे सिर्फ super IO मिलेगा ।

 

Super IO दो प्रकार के होते है –

1)  Programmable

2)  Non-Programmable

 

अब हम कैसे पता करे IO programmable है या non-programmable है, तो इसके लिए हमे सुपर IO पर दिए गए नंबर से online check कर सकते है ।

 

Note आज कल जितने भी super IO programmable ही आते है।

 

Note BIOS 8, 32, 40 पिन की होती है जो मदरबोर्ड मे दिए गए चिप से मोटी और अलग ही होती है।

 

Super IO Company ENE, ITE, NUVOTON, SMS ज्यादातर इस सभी कंपनी की ही मिलती है ।

 

 

 Main Section in Laptop Motherboard

     1) Volt – In Circuit / DC to DC Circuit

     2)   Charging CKT and discharging CKT (1 और 2 charging सेक्शन मे आएगा)

     3)  VRM Section

     4)  Chipset Section / PCH Section (1.05v)  

     5)  Step down Section

     6)  Camera CKT

     7)   CD/DVD

     8)  SATA CKT

     9)  USB

     10) RAM Section

     11) Touch Pad

     12) Mini WiFi

     13) 1.2v / 1.5 / 1.8v

 

 

  

(1/2) Charging Section

Laptop के motherboard मे सभी section मे 19v की सप्लाइ होती है जो charging section के common point से सभी section को जाती है ।

Figure / Diagram -  

 

 

Output = v.in×R2 / R1+R2

CSR / CLR = जहा काही भी यह लिखा मिले वह current sensor resistor होगा यानि की Fusable resistor होता है ।  

 

सबसे पहले डीसी जैक से होते हुए एक नंबर मॉस्फेट से 2 नंबर मॉस्फेट को जाता है (19वोल्ट की supply मॉस्फेट के किस नंबर पर जाएगा वह depend करता है की N-channel मॉस्फेट है या फिर P-channel मॉस्फेट है, 19 वोल्ट की सप्लाइ ड्रैन या सोर्स दोनों मे से किसी एक पर आएगा)

अब दूसरे नंबर मॉस्फेट से होकर CSR (Fusable resistor) से होते हुए common point / Power SRC / DC BAT (Battery) को जाएगा

 

Common पॉइंट main section होगा इसी पॉइंट से सभी सेक्शन को 19 वोल्ट की supply जाएगी।

अब common पॉइंट से voltage discharge मॉस्फेट से होकर बैटरी को जाएगी, जिससे बैटरी चार्ज होती है। अगर चार्जिंग adaptor को निकाल देते है तो कॉमन पॉइंट से AC supply बंद हो जाएगी और बैटरी की supply चालू हो जाएगी , क्योंकि 5 नंबर मॉस्फेट IC को signal भेजता है की AC adaptor disconnect हो गया है। उसके बाद DC की supply चालू हो जाता है।

 

कॉमन point एक charger के रूप मे काम करता है। adaptor को disconnect करने के बाद IC को पता चल जाता है की DC कनेक्टर से charger को निकाल दिया गया है और फिर battery का discharging मॉस्फेट (5 नंबर मॉस्फेट) disable हो जाता है। Disable होते ही battery से वोल्टेज Fusable रिज़िस्टर से होते हुए मॉस्फेट को जाती है फिर आईसी 3 नंबर और 4 नंबर के मॉस्फेट के गते को enable करता है की वोल्टेज सही है या नहीं है । उसके बाद बैटरी का वोल्टेज सभी सेक्शन को जाता है।

 

Note – अगर IC का AC In और AC Out का वोल्टेज नहीं आ रहा है तब पर भी चार्जिंग सेक्शन काम नहीं करेगा।

 

Charging Section Problem and Solution

 

Problem 1Laptop Total Dead

Solution – a) Check DC jack

          b) Check MOSFET no. 1, 2,and Fusable resistor or Coil

          c) Check AC In / DC In and IC

 

Problem 2 – Laptop Work Only Adaptor

Solution – a) Conform / Check Battery OK

          b) Check MOSFET no. 5, 3 and 4

          c) Check IC

 

Problem 3 – Laptop Work Only Battery

Solution – a) Check DC jack

          b) Check MOSFET no. 1, 2, and Fusable resistor and coil

          c) Check AC in / DC in and IC

 

Problem 4 Percentage % not increase / plugin but not charging

Solution – a) Check Another Adaptor

          b) Same Condition Conform Battery

          c) Same check charging CKT MOSFET, CSR, NPC Capacitor, PC capacitor

 

Thursday, September 11, 2025

क्यों सुबह के समय ज्यादा होते हैं हार्ट अटैक,

 मायोकार्डियल इन्फार्क्शन यानी दिल का दौरा दिन के किसी भी समय हो सकता है, लेकिन कई रिसर्च और दिल के डॉक्टरों का कहना है कि सुबह के समय होने वाले हार्ट अटैक ज़्यादा गंभीर और जानलेवा हो सकते हैं|



दिल की बीमारी आज दुनिया भर में मौत का सबसे बड़ा कारण बन चुकी है, और भारत भी इससे अछूता नहीं है। युवाओं में जीवनशैली से संबंधित समस्याएं जैसे तनाव, शारीरिक गतिविधि की कमी, अस्वास्थ्यकर भोजन की आदतें, मोटापा और धूम्रपान जैसे कारक हृदय रोगों का जोखिम बढ़ा रहे हैं।


30 मिनट के भीतर सिगरेट = खतरे की घंटी

रिसर्च बताती है कि जो लोग उठने के 30 मिनट के भीतर सिगरेट पीते हैं, उनमें

  • निकोटीन और टॉक्सिन का अवशोषण सबसे ज्यादा होता है।
  • गहरी सांस लेने की वजह से कार्सिनोज़ेन (कैंसरकारी पदार्थ) तेजी से शरीर में फैलते हैं।
  • हार्ट अटैक और स्ट्रोक का खतरा कई गुना बढ़ जाता है।

डॉ. मित्तल के अनुसार, "सुबह का सिगरेट फेफड़ों को सीधे नुकसान पहुँचाने के साथ-साथ हृदय की नसों पर भी प्रेशर डालता है"

वो चक्कर और "हाई" असल में क्या है?

कई स्मोकर्स मानते हैं कि सुबह का पहला कश उन्हें ताजगी देता है. लेकिन यह असल में ऑक्सीजन डिप्रिवेशन यानी शरीर में ऑक्सीजन की कमी का लक्षण हैपहला सिगरेट निकोटीन लेवल को अचानक बहुत बढ़ा देता है इससे नसों और दिमाग पर जबरदस्त दबाव पड़ता है जो हल्का चक्कर, "रश" या नशा लगता है, वह असल में शरीर की चेतावनी है लत का "ट्रिगर" भी है पहला कश

सुबह का सिगरेट सिर्फ शरीर को नहीं, दिमाग को भी गुलाम बनाता है यह निकोटीन क्रेविंग को पूरे दिन के लिए और मजबूत कर देता है। क्विट स्मोकिंग यानी धूम्रपान छोड़ने की कोशिश को और कठिन बना देता है

हार्मोन और सिगरेट = खतरनाक कॉकटेल

सुबह उठते ही शरीर में कोर्टिसोल और एड्रेनालिन हार्मोन का लेवल बढ़ा होता है. ये हमें एक्टिव और अलर्ट बनाने में मदद करते हैं

लेकिन जब इन्हीं के साथ निकोटीन और टॉक्सिन का मिक्स हो जाता है, तो असर बिल्कुल उल्टा होता है:

  1. ब्लड प्रेशर और हार्ट रेट अचानक बढ़ जाते हैं।
  2. तनाव और चिंता और ज्यादा बढ़ती है।
  3. लंबे समय में हाईपरटेंशन, हार्ट अटैक और स्ट्रोक का खतरा बढ़ जाता है।

नतीजा साफ है: सुबह का सिगरेट = मौत का न्यौता

अगर आप सोचते हैं कि कम सिगरेट पीने से नुकसान कम है, तो ये सोच बदलने का वक्त है असली खतरनाक खेल उस पहले सिगरेट से शुरू होता है, जो आपके पूरे दिन और पूरे शरीर को जहर में डुबो देता है

तो अगली बार जब सुबह-सुबह हाथ सिगरेट की तरफ बढ़े, तो याद रखिए- यह सिर्फ एक कश नहीं, बल्कि आपके दिल और फेफड़ों के लिए सबसे बड़ा वार है


शरीर की बायोलॉजिकल क्लॉक की भूमिका

हमारा शरीर एक प्राकृतिक जैविक घड़ी के अनुसार काम करता है, जिसे सर्कैडियन रिद्म कहा जाता है। यह घड़ी हमारे शरीर के अनेक कार्यों को नियंत्रित करती है—जैसे हार्मोन का स्तर, रक्तचाप और दिल की धड़कन।

वैज्ञानिकों ने पाया है कि सुबह 6 बजे से 12 बजे के बीच शरीर में कोर्टिसोल हार्मोन का स्तर सबसे अधिक होता है, जिससे ब्लड प्रेशर बढ़ जाता है और धमनियों पर दबाव पड़ता है। इससे दिल को ऑक्सीजन की ज़रूरत बढ़ जाती है। यदि धमनियां पहले से संकरी हैं, तो हार्ट अटैक (Heart Attack in The Morning) का ख़तरा बहुत ज़्यादा हो जाता है।


रक्त गाढ़ा हो जाता है

सुबह के समय खून की गाढ़ापन यानी ‘विस्कोसिटी’ बढ़ जाती है। यह खून को थक्के (ब्लड क्लॉट) बनाने की प्रवृत्ति देता है। अगर पहले से धमनियों में फैटी जमा मौजूद हो और ऊपर से थक्का बन जाए, तो खून का प्रवाह बाधित होता है और दिल को ऑक्सीजन मिलनी बंद हो जाती है—जो हार्ट अटैक का सीधा कारण है।


प्लेटलेट्स की सक्रियता बढ़ जाती है

सुबह के समय हमारे शरीर में प्लेटलेट्स यानी रक्त के थक्के बनाने वाली कोशिकाएं ज़्यादा सक्रिय हो जाती हैं। यह एक सामान्य जैविक प्रक्रिया है, लेकिन जिन लोगों की धमनियों में पहले से प्लाक (फैट या कोलेस्ट्रॉल की परत) जमा होता है, उनके लिए यह स्थिति खतरनाक हो सकती है।

प्लेटलेट्स की अधिक सक्रियता के कारण खून में थक्का बनने की संभावना बढ़ जाती है। यदि यह थक्का पहले से संकरी या आंशिक रूप से बंद धमनियों में बन जाए, तो वह पूरी तरह से ब्लॉकेज पैदा कर सकता है। इससे दिल को ऑक्सीजन मिलना बंद हो जाता है, जो सीधे तौर पर हार्ट अटैक का कारण बनता है। यही कारण है कि सुबह के समय हार्ट अटैक ज़्यादा (Heart Attack in The Morning) घातक साबित हो सकते हैं।



लक्षणों को नज़रअंदाज़ करना

व्यक्ति सुबह के समय होने वाले दिल के दौरे के लक्षणों को अनदेखा या गलत समझने की कोशिश करते हैं। सांस लेने में तकलीफ, थकान, सीने में दर्द या बेचैनी जैसे लक्षण अक्सर सामान्य घटना के रूप में या अपच, गैस या नींद के बाद शरीर में कठोरता जैसे मुद्दों से जुड़े होते हैं।

इसके परिणामस्वरूप, व्यक्‍ति चिकित्सीय मदद माँगने में देर करते हैं, यह विश्‍वास करते हुए कि असुविधा अपने आप दूर हो जाएगी । हालांकि यह जानलेवा साबित हो सकता है। परिणामस्वरूप, प्रारंभिक लेकिन महत्वपूर्ण संकेतों को अनदेखा नहीं करना महत्वपूर्ण है क्योंकि वे गंभीर नुकसान या यहां तक कि अचानक हृदय मृत्यु का कारण बन सकते हैं।


सुबह के समय होने वाले हार्ट अटैक से बचाव के उपाय (how to prevent heart attack in the morning)

1 हड़बड़ी में न उठें

धीरे-धीरे जागें। अचानक बिस्तर से न कूदें। धीरे-धीरे उठें, धीरे-धीरे खुद को स्ट्रैच करें। अपने शरीर को समायोजित होने के लिए समय दें। इससे ब्लड प्रेशर में अचानक बढ़ोतरी होती है।

2 पानी पिएं

सबसे पहले हाइड्रेट करें। जागने के बाद एक गिलास पानी पिएं। यह रक्त को पतला करने में मदद करता है, जो क्लॉट के जोखिम को कम करता है जो हृदय धमनियों को अवरुद्ध कर सकता है।

3 हार्ड एक्सरसाइज से बचें 

सुबह के समय तेज गतिविधि से बचें। जागने के तुरंत बाद व्यायाम करने से हृदय (Heart Attack in The Morning) पर दबाव पड़ सकता है। लाइट स्ट्रेचिंग या वॉक का चुनाव करें। अगर आप एक्सरसाइज करते हैं तो अच्छी तरह से गर्म करें।

4 हेल्थ चेकअप करवाते रहें

पुरानी परिस्थितियों का प्रबंधन करें। नियमित जांच, दवा और स्वस्थ जीवनशैली के माध्यम से रक्तचाप, मधुमेह और कोलेस्ट्रॉल पर नियंत्रण रखें। ये दिल के दौरे (Heart Attack in The Morning) के प्रमुख जोखिम कारक हैं।



5 हेल्दी स्लीप

अच्छी नींद लें। खराब नींद शरीर की आंतरिक घड़ी को बाधित कर सकती है और सुबह के तनाव हार्मोन स्तर को बढ़ा सकती है। प्रतिदिन 7-8 घंटे की आराम की नींद का लक्ष्य।

6 लक्षणों के प्रति सतर्क रहें

सीने में दर्द, सांस लेने में तकलीफ, चक्कर आना या सुबह में बाएं हाथ में तकलीफ को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए। तत्काल चिकित्सा सहायता लें।


Friday, August 29, 2025

नेवले पर क्यों नहीं चढ़ता सांप का जहर?

कभी आपने सोचा है कि नेवला इतनी आसानी से सांप से लड़ क्यों जाता है? सांप का जहर तो इतना खतरनाक होता है कि इंसान तक की जान ले लेता है। फिर नेवला कैसे बच जाता है? क्या है इसके पीछे का रहस्य? आइए जानते हैं इस रोचक सवाल का जवाब।




कोबरा जैसा खतरनाक सांप अगर हाथी-घोड़े जैसे बड़े से बड़े जीवों को भी काट ले तो उनका बचना मुश्किल होता है. लेकिन सोचने की बात ये है कि सांपों का दुश्मन नंबर 1 नेवला उस जहर से कैसे बच जाता है? कभी सोचा है? आइए आज हम आपको बताते हैं.


दुनियाभर में यूं तो सांपों की कई प्रजातियां मौजूद हैं, लेकिन उनमें से जहरीले बहुत कम ही होते हैं. इसके बावजूद अगर कोई सांप आंखों के सामने आ जाता है, तो डर से हालत खराब हो जाती है. उस दौरान कुछ समझ ही नहीं आता है कि क्या किया जाए. ऐसा लगता है कि जान ही चली जाएगी. ऐसे में कोबरा जैसा सांप सामने हो तो इंसान सरेंडर ही कर देता है. लेकिन कभी सोचा है कि सांपों का दुश्मन नंबर एक नेवला इनके जहर से कैसे बच जाता है? सोशल मीडिया पर अक्सर सांप और नेवले की लड़ाई का वीडियो वायरल होता रहता है. उस वीडियो में सांप अक्सर नेवले पर अटैक करने की कोशिश करता है, लेकिन अक्सर जीत नेवले की ही होती है. आखिर क्यों सांप का जहर नेवले पर बेअसर हो जाता है?


लेकिन सांप और नेवले के बीच लड़ाई की वजह क्या है? क्यों इन दोनों के बीच इतनी गहरी दुश्मनी है? वाइल्डलाइफ से जुड़े रिपोर्ट्स के मुताबिक, सांप और नेवले की दुश्मनी की वजह प्राकृतिक है. दरअसल, नेवलों का मुख्य भोजन सांप होते हैं. ये सांपों का शिकार करके उन्हें खाते हैं. एक अन्य रिपोर्ट के मुताबिक, नेवले अधिकतर पहले हमला नहीं करते, वो पहले सांप के हमले से खुद को या अपने बच्चों को बचाने की कोशिश करते हैं. इस चक्कर में ही दोनों आमने-सामने आ जाते हैं. बता दें कि भारतीय नेवले को सबसे खतरनाक स्नेक किलर, यानी सांपों का दुश्मन माना जाता है. ये किंग कोबरा तक को मारने में सक्षम होते हैं. एक अन्य वजह यह भी है कि सांप और नेवले दोनों को अपने क्षेत्र में दखलअंदाजी पसंद नहीं है. ऐसे में ये दोनों जीव एक-दूसरे के क्षेत्र में घुस जाते हैं, तो लड़ाई शुरू हो जाती है.





सांप के जहर से कैसे बचता है नेवला?

नेवला और सांप की दुश्मनी तो काफी पुरानी है। अक्सर आपने देखा या सुना होगा कि नेवला, सांप से लड़ाई करता है और जीत भी जाता है। सांप का जहर इतना घातक होता है कि बड़े जानवर भी इसकी चपेट में आकर मर जाते हैं, लेकिन नेवले पर इसका कोई खास असर क्यों नहीं होता? दरअसल, नेवले के शरीर में एक खास तरह का प्रोटीन होता है, जिसे एसिटाइलकोलिन (nicotinic acetylcholine receptor) कहते हैं। ये प्रोटीन सांप के जहर के न्यूरोटॉक्सिक असर को कम कर देता है, जिससे नेवला जहर के बावजूद जीवित रह पाता है। इसे सांप के जहर से “इम्यून” कहा जा सकता है। हालांकि, इसका मतलब ये नहीं है कि नेवला हर बार जीत ही जाता है। कई बार सांप भी नेवले पर भारी पड़ जाता है, खासकर तब जब नेवला कमजोर हो या सांप ज्यादा ताकतवर हो।



दरअसल, नेवले के शरीर में एक खास तरह का प्रोटीन होता है, जिसे एसिटाइलकोलिन (nicotinic acetylcholine receptor) कहते हैं। ये प्रोटीन सांप के जहर के न्यूरोटॉक्सिक असर को कम कर देता है, जिससे नेवला जहर के बावजूद जीवित रह पाता है। इसे सांप के जहर से “इम्यून” कहा जा सकता है। हालांकि, इसका मतलब ये नहीं है कि नेवला हर बार जीत ही जाता है। कई बार सांप भी नेवले पर भारी पड़ जाता है, खासकर तब जब नेवला कमजोर हो या सांप ज्यादा ताकतवर हो।

Sunday, August 3, 2025

सड़क के किनारे पीले, सफ़ेद, जैसे अलग अलग रंग के पत्थर क्यों लगे होते है? जाने......

 








पुराने जमाने में जब GPS जैसी तकनीक नहीं थी, तब लोग मील के पत्थरों के आधार पर यात्रा करते थे.


प्राचीन समय में मील के पत्थरों का उपयोग
पुराने समय में जब हमारे पास सेल फोन या जीपीएस जैसी तकनीक नहीं थी, तब लोग मील के पत्थरों के आधार पर यात्रा करते थे. ये पत्थर न केवल दूरी बताते थे, बल्कि यह भी जानकारी देते थे कि अगला शहर कौन सा है, वह कितनी दूर है और आप किस सड़क पर यात्रा कर रहे हैं.

मील के पत्थरों के रंग और उनके अर्थ
भारत में मील के पत्थर मुख्यतः चार रंगों में होते हैं. भारत सरकार चार प्रकार की सड़कों का रखरखाव करती है.




1.नारंगी मील का पत्थर: पंचायत सड़कें
नारंगी और सफेद रंग का मील का पत्थर ग्रामीण सड़कों को दर्शाता है. ये सड़कें गांवों को मुख्य शहरों और अन्य महत्वपूर्ण सड़कों से जोड़ती हैं. इनका रखरखाव जिले की पंचायतों द्वारा किया जाता है.

इस रंग का माइल स्टोन और मिल का पत्थर अगर आपको दिखाई दे तो समझ लीजिए कि आप किसी गांव-देहात की सड़क पर हैं। आपको बता दें कि ये सड़क प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना (PMGSY) के तहत बनी होती है और इस सड़क की ज़िम्मेदारी जिले के पास होती है। आपकी जानकारी के लिए ये भी बता दें कि देश में पहली बार PMGSY योजना की शुरुआत भारत सरकार ने 25 दिसंबर 2000 में की थी।

2.नीला मील का पत्थर: जिला सड़कें
नीले और सफेद रंग का मील का पत्थर यह संकेत देता है कि वह सड़क एक जिला राजमार्ग है. इन सड़कों का रखरखाव संबंधित जिले के प्रशासन द्वारा किया जाता है.


मील के पत्थर या माइल स्टोन में ऊपरी हिस्सा ब्लैक कलर और नीचे का हिस्सा सफ़ेद कलर होने का मतलब है कि आप किसी बड़े शहर या फिर किसी जिले की सड़क पर सफर कर रहे हैं। आपको ये भी बता दें कि अन्य सड़कों की तरह भी इस सड़क की ज़िम्मेदारी जिले के पास होती है। अगर कभी भी इस सड़क में किसी भी तरह की परेशानी होती है तो स्थानीय जिला प्रशासन राज्य सरकार को सूचित करती है और राज्य सरकार और जिला प्रशासन मिल के इसकी मरम्मत कराते हैं।

3.हरा मील का पत्थर: राज्य राजमार्ग
हरे और सफेद रंग का मील का पत्थर राज्य राजमार्ग को दर्शाता है. राज्य सरकार इन सड़कों का निर्माण और रखरखाव करती है. ये सड़कें राज्य के भीतर मुख्य शहरों और कस्बों को जोड़ती हैं.

आपको जहां भी मील के पत्थर का ऊपरी हिस्सा ग्रीन और नीचे का रंग व्‍हाइट कलर का दिखाई दे तो समझ लीजिए कि आप किसी नेशनल हाईवे पर नहीं बल्कि किसी स्टेट हाईवे पर सफर कर रहे हैं। इस सड़क की देख-रेख का ज़िम्मा सेंट्रल गवर्मेंट के पास ना हो के राज्य सरकार के पास होता है। अगर सड़क टूटती-फूटती है तो उसको सही कराना राज्य सरकार का काम होता है।


4.पीला मील का पत्थर: राष्ट्रीय राजमार्ग
यदि मील का पत्थर पीला और सफेद रंग का है, तो वह राष्ट्रीय राजमार्ग को दर्शाता है. ये सड़कें विभिन्न राज्यों को जोड़ती हैं और भारी वाहनों के आवागमन के लिए डिज़ाइन की गई होती हैं.
आप जिस रोड के रास्ते जा रहे हैं उस रोड़ के किनारे लगे मील के पत्थर का अगर ऊपरी हिस्सा पीले कलर का और नीचे का हिस्सा सफ़ेद कलर का दिख जाए तो समझ लीजिए कि आप किसी नेशनल हाईवे यानि राष्ट्रीय राज्य मार्ग पर सफर कर रहे हैं। इस रंग के माइल स्टोन का अर्थ ये भी है कि इस सड़क को सेंट्रल गवर्मेंट यानि केंद्र सरकार ने बनवाया है, और इस सड़क की देख-रेख केंद्र सरकार के पास है।