Tuesday, March 31, 2026

जादूई चिड़िया

एक समय की बात है राजा फ़ौजीसिंह के राज्य में अकाल पड़ गया। राज्य में किसी को परेशानी न हो इसलिये राजा ने अपने खजाने खाली कर दिये और अन्य राज्यों से अनाज, सब्जियॉं मंगा कर जनता को बचाया। लेकिन इसके कारण राजकोष खाली हो गया। राजा फ़ौजीसिंह और उनकी रानी सोनमती बहुत चिंतित थे।



वे दोंनो अपने कुलगुरु के पास गये जो पास ही के जंगल में कुट्यिा बना कर रहते थे। राजा ने अपनी सारी परेशानी उनके सामने रखी। कुलगुरु ने कहा ‘‘मैं तुम्हें एक चिड़िया देता हूं जब तक यह तुम्हारे पास रहेगी। तुम्हारे राज्य में खुशहाली रहेगी। जो भी निर्णय लो इससे पूछ कर लेना। लेकिन यह तुम्हारे अलावा किसी ओर के सामने कुछ नहीं बोलेगी।’’



राजा और रानी दोंनो चिड़िया को लेकर चल देते हैं। तभी गुरुजी ने कहा ‘‘राजन इस चिड़िया को हमेशा खुश रखना नहीं तो तुम भी खुश नहीं रह पाओगे।’’


राजा रानी चिड़िया को राजमहल में ले आते हैं। इसके बाद राज्य से संबन्धित जो भी निर्णय लेने होते राजा अकेले में चिड़िया से पूछता और चिड़िया जो बताती उसके अनुसार निर्णय लेता था।


देखते ही देखते राज्य बहुत खुशहाल हो गया। यह देखकर राजा रानी बहुत खुश हुए लेकिन राजा को एक डर सताने लगा कि कल इस चिड़िया को कोई ले गया तो क्या होगा। यह सोचकर राजा चिड़िया को कहीं बाहर नहीं जाने देता था। उसे पिंजरे में कैद रखता था। रानी के महल में चिड़िया रहती जहां किसी को जाने नहीं दिया जाता था।



एक दिन रानी ने राजा को बताया ‘‘महाराज चिड़िया बहुत उदास है कल से उसने दाना भी नहीं चुगा है।’’


राजा ने उससे जाकर कारण पूछा लेकिन चिड़िया कुछ नहीं बोली।


अब राजा उससे राज्य के संबंधित कोई भी प्रश्न करता चिड़िया चुप रहती थी।


राजा चिड़िया को लेकर अपने कुलगुरु के आश्रम पहुंच गया।


कुलगुरु ने कहा ‘‘राजन इस नन्ही सी जान ने तुम्हारे राज्य को समृद्ध बना दिया और तुमने इसे कैदियों की तरह पिंजरे में कैद कर दिया इसकी आजादी छीन ली’’


राजा ने कहा ‘‘लेकिन महाराज मैं इसे शत्रुओं से बचाना चाह रहा था।


कुलगुरु ‘‘नहीं राजन तुम इसे खोने से डर रहे थे। क्योंकि तुम अब सही निर्णय लेने के काबिल नहीं रहे।


राजा को बात समझ में आ जाती है। वह कहता है – ‘‘गुरु जी मुझे अपनी भूल का अहसास है। मैं अब किसी चिड़िया की मदद से राज पाठ नहीं चलाउंगा अब मैं खुद निणर्य लूंगा।



यह कहकर वह वापस आकर अपने राज्य की देखभाल करने लगा।


शिक्षा: किसी भी जीव की आजादी छीन लेने से उसकी प्रतिभा नष्ट हो जाती है। जीवन में हमेशा आजाद पंछी की तरह उड़ान भरो ज्यादा चिंता, भी एक प्रकार की कैद है इससे बाहर निकल कर देखो रास्ते स्वयं नजर आने लगेंगे।

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