एक नगर में मानसिंह नाम का राजा राज करता था। राजपाठ उसे विरासत में मिला था। राजा दिन रात अपने ऐशो आराम में लगा रहता था। जिसके कारण उसके मंत्री उसका खजाना धीरे धीरे खाली कर रहे थे राजा को इसके बारे में कुछ पता नहीं था।
राजा के एक पिता के पुराने रसोइये राजाराम जो बहुत इमानदार थे। वे इस बात से बहुत दुखी थी कि कैसे इस नगर को बर्बाद होने से बचाया जाये।
एक दिन वे अपने घर पर इसी बात पर चिंता कर रहे थे तभी उनकी बेटी जिसका नाम लक्ष्मी था वह अपने पिता की परेशानी पूछ बैठी। राजाराम ने पूरी बात अपनी बेटी को बता दी।
लक्ष्मी ने अपने पिता को एक उपाय बताया। जिसे सुनकर राजाराम बहुत खुश हुए। अगले दिन वे राजा मानसिंह के सामने गये और उन्होंने कहा ‘‘महाराज आज आपके लिये जो खाना बनने वाला है। उसमें किसी भी प्रकार के मसाले नहीं होंगे’’
राजा को चटपटा खाना बहुत पसंद था। उसने कहा ‘‘राजाराम आप हमारे पिता के पुराने रसोइये हो इसलिये हम आपकी बहुत इज्जत करते हैं। लेकिन इसका यह मतलब नहीं कि आप कुछ कहेंगे। आपसे नहीं बन सकता तो हम कोई दूसरा रसोईया नियुक्त करेंगे आप जा सकते हैं।’’
तब राजाराम ने कहा ‘‘ठीक है महाराज लेकिन मैंने ऐसा क्यों कहा इसका कारण तो जान लीजिये। कारण यह है कि आपके राज्य में कोई भी किसान मसाले की खेती नहीं कर रहा क्योंकि फसल लगाने का खर्च ज्यादा आता है और मसाले बिकते नहीं हैं। जिसका कारण है मसालों का महंगा होना’’
राजा ने कहा ‘‘लेकिन ऐसा क्यों’’
राजाराम ने जबाब दिया ‘‘महाराज हमारे राज्य में जनता को भोजन तक नहीं मिलता तो उसमें वे मसाले कहां से डालेंगे। जो भी मसाले पैदा होते वे राजमहल में चले जाते हैं। या फिर आपके मंत्रियों के घर जोकि बिना पैसे दिये मसाले ले जाते हैं। इस कारण बाजार में मसाले हैं ही नहीं और अगर हैं भी तो बहुत मंहगे हैं।’’
राजा ने कहा ‘‘लेकिन जनता इतनी गरीब क्यों हैं’’
राजाराम ने जबाब दिया ‘‘महाराज आपका आधा खजाना खाली हो चुका है राज महल के सभी दरबारी उसे खाली कर रहे हैं। आपका पूरा खजाना खाली होने में बहुत कम वक्त बचा है। अभी तो मसाले बंद हो रहे हैं आगे खाना भी बंद हो जायेगा।’’
राजा को अक्ल आ गई उसने कहा ‘‘राजाराम जी आज से आप मेरे महामंत्री और कोषाध्यक्ष रहेंगे। सभी मंत्रियों को फांसी पर लटका दीजिये।’’
यह सुनकर सभी मंत्री राजा से माफी मांगने लगे।
तब राजाराम ने कहा ‘‘महाराज इन्हें एक मौका दीजिये ये अपना काम सही से करें नहीं तो सजा मिलेगी’’
राजा ने राजाराम को सारा कार्यभार संभलवा दिया। राजाराम ने सारी व्यवस्था ठीक करके एक वर्ष में खजाना पहले जैसा कर दिया और जनता के हित में काम किये जिससे जनता का विश्वास राजा के प्रति बढ़ गया।
शिक्षा: एक समझदार व्यक्ति सभी को संकट से निकाल सकता है। जैसे एक रस्सी कुए में गिरे व्यक्ति को निकाल लेती है।







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