Tuesday, December 16, 2025

SMPS Diagram, Part No4= Output Section

 

Output Section

आउट्पुट सेक्शन का काम है ac को फिर से dc मे convert करना होता है । इसमे शॉर्ट / scholtky diode लगे होते है।

 Problem 

1- इस सेक्शन मे अगर +5v / +12v / +3.3v इनमे से कोई एक वोल्टेज absent है तो इस कन्डिशन मे scholtky diode, coil और capacitor को चेक करे ।

2 - अगर -5v / -12v भी absent हो तो इस कन्डिशन मे केवल diode, coil एण्ड filter capacitor को चेक करे

 

   

 

Very Important

SMPS को चेक करने के लिए सबसे पहले आपको आउट्पुट के तार को मल्टीमीटर से चेक करना पड़ेगा। मल्टीमीटर के काले तार को smps के आउट्पुट काले तार मे लगा देना है ।

Note - SMPS को खोलने से पहले आपको आउट्पुट तार को चेक करना चाहिए ।

सबसे पहले SMPS मे लगने वाले इनपुट socket को चेक करे, अगर मल्टीमीटर मे बीप आती है पावर केबल को SMPS मे connect न करे ।

अगर बीप नहीं आ रही तो सही है ।

Friday, December 12, 2025

आग लगने पर जलने से ज़्यादा मौतें इस वजह से होती हैं ! आग लगने पर क्या करें?

 

1. फायर अलार्म बजते ही सतर्क हो जाएं (Be Alert With Fire Alarm)


👉 अलार्म की आवाज़ अनसुनी न करें।

  • आग लगने की सबसे पहली चेतावनी होती है फायर अलार्म। अगर कहीं भी अलार्म बजे तो यह मान कर चलें कि खतरे की शुरुआत हो चुकी है।
  • तुरंत आसपास के लोगों को भी सतर्क करें।
  • बिजली की मुख्य लाइन को (अगर सुरक्षित हो) बंद कर दें।

  • 2.फायर एग्जिट का इस्तेमाल करें, लिफ्ट नहीं (Use Fire Exit, Not Lift)

    👉 पैनिक न करें – एग्जिट की तरफ शांत और तेज़ी से बढ़ें।

    • इमरजेंसी के समय लिफ्ट का उपयोग न करें।
    • सीढ़ियों या फायर एग्जिट के रास्ते तुरंत बाहर निकलें।
    • यदि धुआं भर चुका हो तो झुक कर चलें ताकि ताज़ी हवा मिलती रहे।

  • 3. रेत-बाल्टी और पानी का सही इस्तेमाल करें (Use Sand and Water Buckets Properly)

    👉 आग पर काबू पाने में सबसे पुराने लेकिन कारगर तरीके।

    • किचन या छोटे आग के मामलों में रेत-बाल्टी से आग को ढक दें।
    • पानी सिर्फ तब इस्तेमाल करें जब आग किसी इलेक्ट्रिक या ऑयल बेस्ड स्रोत से न हो।
  • 4.फायर एक्सटिंग्विशर का इस्तेमाल करें (Use Fire Extinguisher Wisely)

    👉 हर किसी को सीखनी चाहिए इसकी बेसिक ट्रेनिंग।

    • एक्सटिंग्विशर के ऊपर लिखा होता है वह किस प्रकार की आग के लिए है (A, B, C, K टाइप)।
    • "PASS" फॉर्मूला याद रखें:
      Pull the pin
      Aim at the base
      Squeeze the handle
      Sweep side to side
  • 5.101 पर कॉल करें और सहायता मांगें (Call Fire Brigade at 101)

    👉 प्रोफेशनल मदद में देरी न करें।

    • आग पर काबू पाने की कोशिश करने के साथ ही तुरंत 101 डायल करें।
    • आसपास के पुलिस या मेडिकल यूनिट को भी सूचित करें।
    • अपने मोबाइल में लोकल फायर स्टेशन का नंबर सेव रखें।

आग से पीड़ित इंसान को कैसे ट्रीटमेंट करे

  • सर्वप्रथम पीड़ित को कम्बल से लपेट दे।
  • तुरंत १०१ नंबर पर फायर ब्रिगेट को कॉल ( call ) करके सुचना दे।
  • फायर अलार्म को सक्रीय करे।
  • पीड़ित को जल्दी से जल्दी तत्काल अस्पताल पहुचाये।
  • आग – आग लगने पर जोरो जोरो से चिल्लाकर लोगोको सचेत करे की आग लगी है।
  • नाक और मुँह को गीले कपडे से ढक ले।
  • दुर्घटना हुए स्थल के नजदीक भीड न लगाए।
  • आग पर निष्क्रिय ग्यास छोड़कर ऑक्सिजन की पहुच कम करे।
  • आग पर ड्रइ पावडर छिड़के।

आग लगने से कैसे बचे और किन बातो का रखे ध्यान ?

  • अपने घर तथा कार्यालय में स्मोक डिटेक्टर लगाए।
  • घर में बेवजह की रद्दी यानि पेपर प्लास्टिक व कचरा न रखे क्योकि,ये वस्तू में जल्दी आग पकड़ती है
  • खेत में सुखी घास,लकडिया आदि महफूज जगह पर रखे।
  • अपनी ईमारत ( Building ) की समिति को हर छह महीने में अग्निशमन अभ्यास कराए।
  • अग्निशामक यंत्र का उपयोग कब और कैसे करना है ,इस बारे में अवश्य जानकारी होनी चाहिए।
  • अग्नि सीढ़ी खरीदते समय सुरक्षा प्रमाणित सूचीबद्ध ब्रांड की तलाश करे।
  • कभी भी घर में या इमारतों में जलती हुई मोमबत्ती या दिया अकेले न छोड़े।
  • अन्य उद्देश्य के लिए अग्नि सुरक्षा उपकरणों का प्रयोग न करे।
  • अपने काम के स्थान को स्वछ और व्यवस्थित रखे।
  • रासायनिक बोतल को हाथ में न ले।



Thursday, December 11, 2025

SMPS Diagram, Part No3= Switching Section / Push-Pull section

 

(3) Switching Section / Push-Pull section



पहचान 

इस सेक्शन मे दो switching transistor heat sink के साथ लगे होते है और SMT (Switching Mode Transformer) की primary winding और driver transformer की secondary winding होती है।

 

काम – 300 dc वोल्ट को लेकर उसे ac  मे बदलने का काम करता है और SMT (Switch mode transformer) को provide करता है। kaun

 

Fault (खराबी) 

यदि Switching mode transformer की secondary winding पर ac voltage (2 से 45 वोल्ट तक ) आ रही है तो यह सेक्शन काम कर रहा है यदि नहीं आ रहा है तो switching mode transformer सेक्शन काम नहीं कर रहा है।

 

 

Problem /Solution

Problem 1- SMT (Switching Mode Transformer) की secondary winding पर कोई ac voltage नहीं आ रहा है ।

Solution 

PS-on (green and black wire को short करने के बाद) करने के बाद control ic osc दे रहा है लेकिन switching सेक्शन काम नहीं कर रहा है तो दोनों transistor को coil टेस्टिंग करे, हो सकता है खराब हो ।  इसके अलावा PWN CKT (pulse width modulation) के component driver transformer को भी चेक करे ।

 

 

Problem – Switching Transistor बार बार खराब हो रहा है ।

Solution

इस कन्डिशन मे SMT (Switching Mode Transformer) के secondary wire shorting है । तो इसके लिए filter capacitor, coil, school key diode को चेक करे।

 

 

 

 

Problem 1 PS-ON (Green wire की वोल्टेज ) नहीं हो रहा है।

Solution इस कन्डिशन मे सबसे पहले कंट्रोल की सप्लाइ चेक करे ।

यदि सप्लाइ आ रही है लेकिन PS -on  नहीं बन रहा है , तो कंट्रोल IC के पास लगे सारे component को चेक करे । यदि component सही है तो फिर IC को resold  करे लेकिन उसके बाद भी same प्रॉब्लेम आ रही है तो IC को बदल देना है और यदि सप्लाइ नहीं आ रही है तो startup section मे लगे diode और capacitor को चेक करे।

 

Problem 2 PS-On आ रहा है लेकिन शॉर्ट ( हरे और काले तर को किसी मेटल या तयार की मदद से सटाने पर ) करने के बाद ऑन नहीं हो रहा है।

Solution इस कन्डिशन मे IC का आउट्पुट signal check करे , यदि signal नहीं आता है तो इक मे प्रॉब्लेम है , यदि सिग्नल आ रहा है तो driver transformer की secondary वाइंडिंग पर वोल्टेज चेक करे । .2v - 12v ac  वोल्टेज आ रही है तो केवल power circuit और switching को चेक करे । यदि वोल्टेज नहीं आ रही है तो केवल प्राइमेरी वाइंडिंग के लगे driver transformer को चेक करे। 

 

Problem 3 -PSON short करने के बाद SMPS on हो रहा है लेकिन सारी आउट्पुट वोल्टेज कम आ रहा है ।

Solution इस कन्डिशन मे कंट्रोल के supporting component  को चेक करे उसके बाद यदि कम्पोनन्ट सही है तो IC को बदल दे ।

Sunday, December 7, 2025

SMPS Diagram, Part No2= Short-up section

 

(2) Short-up section

पहचानswitching with heat, opto coupler IC , Start-up transformer, driver, transistor, aur SBV (stand by voltage) wire  इसी सेक्शन मे लगी होती है। stand by wire +5 वोल्ट का होता है और wire का रंग violate ( बैगनी ) होता है।

काम- यह 300 dc वोल्ट को control IC supply मे और SBV (Stand by voltage )मे कन्वर्ट करता है।

Figure -

 

 

 Fault यदि स्टैन्ड बाई वोल्टेज (SMPS मे से Stand by wire पर भी वोल्टेज चेक कर सकते है अगर वोल्टेज आती है तो )  आ रहा है तो यह सेक्शन सही है। अगर वोल्टेज नहीं आ रहा है तो खराब है stand by section

  

Problem /Solution

Problem 1- Stand By Voltage नहीं आ रहा है या फिर control IC supply  नहीं आ रही हो ।

Solution इस कन्डिशन मे सबसे पहले ac voltage startup transformer के सेकन्डेरी वायर चेक करे। यहा पर .2 वोल्ट से लेकर 20 या 40 वोल्ट ac आणि चाहिए। यदि ac वोल्टेज आ रही है लेकिन stand by voltage नहीं आ रहा है तो इसका मतलब secondary winding साइड की प्रॉब्लेम है तो केवल diode, filter capacitor, और coil चेक करे ।

यदि ac startup transformer के secondary winding पर नहीं आ रहा है तो प्राइमेरी winding side  की problem है ।

तो हमे startup transformer, driver transistor, kicking resistor, aur opto coupler IC को चेक करे ।

 

 

 

Monday, December 1, 2025

ट्रेन के डिब्बों का अलग - अलग रंग आखिर क्या दर्शाते हैं ?


भारत में रेलवे यातायात का एक प्रमुख साधन है और ये देश के लोगों के आम जन-जीवन का एक अहम हिस्सा भी है अधिकतर आप सब ने ट्रेन में सफर किया ही होगा लेकिन कभी आप ने ध्यान दिया है कि सभी ट्रेनें कुछ अलग-अलग रंगों में रंगी होती हैं क्या आप जानते हैं आखिर ऐसा क्यों होता है ? 

ट्रेन का सफर बेहद किफायती और आरामदायक होता है। जिसके चलते ट्रेन से रोजाना लाखों यात्री सफर करते हैं भारतीय रेलवे ट्रेन में सभी वर्ग के लोगों के हिसाब से कोच उपलब्ध कराती है जिसमें जनरल, स्लीपर व एसी कोच मौजूद होते हैं अक्सर आपने देखा होगा कि सभी यात्री ट्रेनों में डिब्बों की संख्या और ट्रेन की लंबाई लगभग समान होती है यात्री ट्रेनों में अधिकतम 24 डिब्बे होते हैं. वहीं, मालगाड़ी में 40 से 58 तक डिब्बे होते हैं

भारतीय रेलवे दुनिया का चौथा सबसे बड़ा रेल नेटवर्क है। हर रोज़ लाखों की संख्या में लोग ट्रेन से यात्रा करते हैं ट्रेन की बोगियां कई तरह की होती हैं जैसे की एसी कोच, स्लीपर कोच और जनरल कोच. ट्रेन में अलग-अलग प्रकार के कलर के डिब्बे भी देखने को मिलते हैं जैसे लाल, नीला, हरा, इत्यादि. परन्तु इन रंगों का क्या अर्थ है. क्यों होते है कोच अलग-अलग कलर के. आइये जानते हैं.


ट्रेन में कितना होता है डिब्बे का साइज
ट्रेन में अधिकतम 24 डिब्बे हो सकते हैं क्योंकि इंडियन रेलवे में एक डिब्बे की लंबाई करीब 25 मीटर होती है यदि हम 24 डिब्बे वाली ट्रेन की कुल लंबाई देखें तो 24×25= 600 मीटर हो जाएगा। इसमें एक इंजन होगा और हो सकता है एक लगेज का डिब्बा भी हो तो एक ट्रेन की कुल लंबाई 650 मीटर हो जाएगी रेलवे की लूप लाइन लगभग 650 मीटर की होती है लूप लाइन रेलवे प्लेटफार्म की लंबाई को कहते हैं जहां पर ट्रेन रूकती है



ट्रेन के डिब्बों का रंग लाल, नीला और हरा इत्यादि क्यों होता है?

इंटीग्रल कोच फैक्ट्री स्वतंत्र भारत की शुरुआती उत्पादन इकाइयों में से एक है इसका उद्घाटन भारत के प्रथम प्रधानमंत्री पं. जवाहरलाल नेहरू ने 2 अक्टूबर, 1955 को किया था. बाद में 2 अक्टूबर, 1962 को फर्निशिंग डिवीजन का उद्घाटन किया गया और कुछ ही वर्षों में पूरी तरह से सुसज्जित कोचों का उत्पादन होने लगा 

वहीं बात करे Linke Hofmann Busch (LHB) कोच की तो ये भारतीय रेलवे के यात्री कोच हैं जिन्हें जर्मनी के Linke-Hofmann-Busch द्वारा विकसित किया गया था और ज्यादातर भारत के कपूरथला में रेल कोच फैक्ट्री द्वारा निर्मित किया गया था.

LHB कोच तेज गति से यात्रा कर सकते हैं। कोचों को 160 किमी/घंटा तक की परिचालन गति के लिए डिज़ाइन किया गया है और यह 200 किमी/घंटा तक जा सकता है


आखिर क्यों होते हैं ट्रेन में लाल रंग के कोच ?

लिंक हॉफमेन बुश (LHB) बाए डिफ़ॉल्ट लाल रंग के कोच हैं। साल 2000 में ये कोच जर्मनी से भारत लाए गए थे और अब यह पंजाब के कपूरथला में बनते हैं। ये डिब्बे स्टेनलेस स्टील के बने होते हैं और आंतरिक भाग एल्युमीनियम से बने होते हैं जो पारंपरिक रेक की तुलना में इन्हें हल्का बनाते हैं इन कोचों में डिस्क ब्रेक भी होती है इसी कारण से ये 200 किमी प्रतिघंटा की रफ्तार तक भाग सकते हैं इन कोचों का इस्तेमाल राजधानी, शताब्दी जैसी ट्रेनों के लिए किया जाता है जो तेज़ गति से चलती हैं ऐसा कहा जाता है  कि अब सभी ट्रेनों में इन कोचों को लगाने की योजना है

नीले रंग का कोच 

आपने देखा होगा कि ज्यादातर ट्रेन के डिब्बे नीले रंग के होते हैं जो यह दर्शाता है कि ये कोच ICF कोच हैं। ऐसे कोच मेल एक्सप्रेस या सुपरफास्ट ट्रेनों में लगाए जाते हैं

इंटीग्रल कोच फैक्ट्री (ICF) कोच पारंपरिक यात्री कोच हैं जिनका उपयोग भारत में अधिकांश मेन-लाइन ट्रेनों में किया जाता है इन कोचों का डिज़ाइन 1950 के दशक में स्विस कार एंड एलेवेटर मैन्युफैक्चरिंग कंपनी, श्लीरेन, स्विटज़रलैंड (Swiss Car & Elevator Manufacturing Co, Schlieren, Switzerland) के सहयोग से इंटीग्रल कोच फैक्ट्री, पेरम्बूर, चेन्नई, भारत द्वारा विकसित किया गया था। ICF भारतीय रेलवे की चार रेक उत्पादन इकाइयों में से एक है  भारतीय रेलवे का इरादा ICF कोचों को चरणबद्ध तरीके से हटाने और उन सभी को नए LHB कोचों से बदलने का है

हरे रंग का कोच 

गरीब रथ ट्रेन में हरे रंग के डिब्बों का इस्तेमाल होता है भूरे रंग के डिब्बों का उपयोग मीटर गेज की ट्रेनों में किया जाता है

रंग बदलना यात्रियों के अनुभव को सुखद बनाने के रेलवे के प्रयासों का हिस्सा है कोचों का मेकओवर यात्रा के अनुभव को बढ़ाने के लिए रेलवे के उपायों का हिस्सा है क्योंकि यह देश भर में अपने नेटवर्क को सुधारना और यात्री अनुभव में सुधार करना चाहता है। रेलवे अतिरिक्त सुविधाओं के साथ कोचों के अंदरूनी हिस्सों को बेहतर बनाने के लिए भी काम कर रहा है, जिसमें सभी शौचालयों को बायो-टॉयलेट से बदलने, प्रत्येक बर्थ पर मोबाइल चार्जर और आरामदायक सीटों पर उपलब्ध कराने के कदम शामिल हैं वहीं भारतीय रेलवे में कलर स्कीम में बदलाव देखने को मिल ही जाता है

एक डिब्बे में कितनी होती हैं सीटें

किसी भी ट्रेन के डिब्बे में सीटों की संख्या डिब्बे की कैटेगरी पर निर्भर करता है क्योंकि एसी बोगी के डिब्बे में सीटों की संख्या सबसे कम होती है और उसके बाद फिर स्लीपर में सीटों की संख्या AC वाली डिब्बे से अधिक होती है और फिर लास्ट में सबसे अधिक सीटों की संख्या जनरल डिब्बे में होती है ट्रेन के स्लीपर कोच में यानी कि स्लीपर वाले डिब्बे में सीटों की संख्या 72 ,74 या 80 होती हैं कुछ ट्रेनों में स्लीपर डिब्बे में सीटों की संख्या 74 तो कुछ में 72 और कुछ ट्रेनों में 80 होती है कुछ ट्रेन में एसी वाले डिब्बों में सीटों की संख्या 46 और कुछ ट्रेनों में सीटों की संख्या 154 होती है

Saturday, November 29, 2025

PC/Computer Basic Part




Computer-:
Computer is an automatic electronic machine which help to calculate the data store and retrieve the data. It is generally work on binary number system 0 & 1. Computer is a combination of hardware and software.

It accept data, process data and generate output data.

कंप्यूटर एक स्वचालित इलेक्ट्रॉनिक मशीन है जो डेटा स्टोर की गणना करने और डेटा को पुनः प्राप्त करने में मदद करता है। यह आम तौर पर बाइनरी नंबर सिस्टम 0 और 1 पर काम करता है। कंप्यूटर हार्डवेयर और सॉफ्टवेयर का मिश्रण है.

यह डेटा स्वीकार करता है, डेटा प्रोसेस करता है और आउटपुट डेटा generate करता है।

 

Stand for of Computer-:

C= Compute, Commonly, Calculate

O= Operator, operated

M= Machine

P= Processor, particular

U= Used for

T= Trade/ Technology

E= Education

R= Research

Comman operating machine particularly used for trade education and research

 

Working Concept

Data-: Data is collection of text figure, diagram voice photo etc. You can say in other anything you into computer that is know as data.

Process-: If convert meaningless data into meaningfull data.

Information-: After process you get result that is known information.

 

Computer is divided into two parts

कंप्युटर को दो भागों मे बाटा गया है

(1) Computer Hardware ( कंप्युटर हार्डवेयर )

   (2) Computer Software ( कंप्युटर सॉफ्टवेयर )

(1) Computer Hardware-: All physical part of computer that know as computer hardware.

कंप्यूटर के सभी फिज़िकल भाग जिन्हें कंप्यूटर हार्डवेयर कहा जाता है।

Or

Those part of computer we can see and touch that is knowns as computer hardware.

कंप्यूटर का वह भाग जिसे हम देख और छू सकते हैं, कंप्यूटर हार्डवेयर कहलाता है।

Like as:- CPU, Monitor keyboard etc.

Ø Type of Computer Hardware

a.  Input Unit Device

b.  Output Unit Device

c.  CPU (Central Processing Unit)

d.  MCD (Mass Storage Device)

(a) Input unit device:- That device of computer which is used to in data in to the computer that is called input device.

कंप्यूटर का वह उपकरण जिसका उपयोग कंप्यूटर में डेटा भेजने के लिए किया जाता है, इनपुट डिवाइस कहलाता है।

Ex- keyboard, Mouse, Scanner

(b) Output unit device-: That device of computer, which is used to out data from computer is called output device.

कंप्यूटर का वह उपकरण, जिसका उपयोग कंप्यूटर से डेटा निकालने के लिए किया जाता है, आउटपुट डिवाइस कहलाता है.

     Ex- Monitor, Printer, Plotter, Projector, Specker etc.

(c) CPU (Central Processing Unit):- It is central device and connect all device with it. It receive command from input device and process it given to output device. It is include-

1.  ALU (Arithmetic Logical Unit)

2.  CU (Control Central Unit)

3.  MU (Memory Unit)


(1) Mass Storage Device (MCD):- Those device of computer which is used to store data that devices is called mass storage device.

कंप्यूटर की वह डिवाइस जिसका उपयोग डेटा को स्टोर करने के लिए किया जाता है उस डिवाइस को मास स्टोरेज डिवाइस कहा जाता है।

Ex- Pendrive, Hard disk, Floppy, CD, DVD Memory card.