Tuesday, February 24, 2026

ग्रीस का रंग, उसकी बनावट और उसका काम

दरअसलग्रीस का रंगउसकी बनावट और उसका काम – तीनों एक-दूसरे से जुड़े होते हैं 


                                    


आज हम आपको आसान भाषा में बताएंगे कि कौन-सा ग्रीस कहाँ लगता हैकौन सा ग्रीस ज़्यादा टेम्परेचर झेल सकता हैऔर ग्रीस के “ग्रेड यानी NLGI नंबर का असल मतलबक्या है?

ग्रीस दरअसल लुब्रिकेशन ऑयल और एक थिकनर (गाढ़ा करने वाला पदार्थ) का मिश्रण होता है।यानी इसमें तेल तो होता ही हैलेकिन उसे इतना गाढ़ा कर दिया जाता है कि वो जगह से बहता नहीं — बल्कि वहीं चिपका रहता है और मूविंग पार्ट्स को लगातार चिकनाई देता रहता है। 

इसका काम है घर्षण कम करनाजंग से बचाना और पार्ट्स की लाइफ बढ़ाना।

1.  लिथियम ग्रीस: ये सबसे आम और जनरल पर्पज़ ग्रीस है जो लगभग हर मशीनरी में काम आता है।इसे आप गाड़ियों के दरवाज़ों के hinges, चेसिसफैन या छोटे पंप जैसे हिस्सों में लगा सकते हैं।ये -20°C से +120°C तक आराम से काम करता है और इसका ग्रेड NLGI-2 सबसे ज़्यादा प्रचलित है। यह अत्यधिक चिपचिपा और टिकाऊ ग्रीस है। यह धातु-से-धातु अनुप्रयोगों के लिए स्नेहन के लिए बहुत अच्छा है। यह संक्षारण, चरम मौसम और टूट-फूट से सुरक्षा का भी समर्थन करता है। उच्च दबाव और सदमे भार को सहन करने की इसकी क्षमता इसे वाहनों और औद्योगिक उद्देश्यों के लिए उपयुक्त बनाती है

  1. कैल्शियम ग्रीस: जो आमतौर पर पीले रंग में मिलता है।ये उन जगहों पर लगाया जाता है जहाँ पानी का कॉन्टैक्ट ज़्यादा होता है। जैसे –वाटर पंपनाव की मशीनेंट्रैक्टर के अंडरकैरेज या खेतों की गीली मशीनरी। इसकी सबसे बड़ी खासियत है –water resistance यानी पानी में भी अपनी पकड़ बनाए रखता है। इसका ग्रेड आमतौर पर NLGI-2 से NLGI-3 होता है। 


यह उत्पादित सबसे सामान्य उद्देश्य वाले ग्रीस में से एक है।  यह उच्च तापमान वाले कामकाज के लिए उपयुक्त नहीं है, जो इसे औद्योगिक, समुद्री और कृषि अनुप्रयोगों के लिए उपयुक्त बनाता है।

 

3. लिथियम कॉम्प्लेक्स ग्रीसजो लाल रंग में मिलता है। ये हेवी-ड्यूटी ग्रीस है और लिथियम ग्रीस से एक कदम आगे। ये बहुत ज़्यादा तापमान और प्रेशर झेल सकता है।


ये ट्रकबसव्हील बेयरिंग्स और हाई-लोड मशीनरी में काम आता है।इसका टेम्परेचर रेंज -30°C से लेकर +170°C तक जा सकता है और ये हाई-टेम्परेचर ग्रेड में आता है। 

 

4. काला मोलिब्डेनम ग्रीसजिसे “मॉली ग्रीस भी कहा जाता है। इसमें एक खास मेटल एडिटिव होता है – Molybdenum disulfide ये पार्ट्स के बीच एक मजबूत प्रोटेक्टिव लेयर बना देता है जिससे घर्षण बहुत कम होता है। इसे CV joints, U-joints, bulldozer, crane या construction मशीनों में इस्तेमाल किया जाता है। ये हाई प्रेशर और शॉक लोड वाली जगहों पर बहुत टिकाऊ साबित होता है 



 

5. सिलिकॉन ग्रीसजो सफेद या पारदर्शी दिखता है।ये खासकर रबर और इलेक्ट्रिकल पार्ट्स में इस्तेमाल किया जाता है क्योंकि ये रबर को खराब नहीं करता।इसे इलेक्ट्रिकल कनेक्टर्सरबर सीलकार के दरवाज़ों की रबर लाइनिंग या बैटरी टर्मिनल पर लगाया जाता है।इसकी खासियत है कि ये -40°C से +200°C तक टिक सकता है। 

6.पॉलीयूरिया ग्रीस कीजो आमतौर पर हरे रंग में मिलता है।ये लॉन्ग लाइफ और हाई टेम्परेचर ग्रीस है।इसे sealed bearings, electric motors और industrial fans में लगाया जाता है।


इसकी खासियत ये है कि ये oxidation और rust दोनों से बचाता है और कई बार 5 से 10 साल तक बिना बदले काम करता रहता है। 

7. फूड इंडस्ट्री में इस्तेमाल होता है एल्यूमिनियम कॉम्प्लेक्स ग्रीसजो हल्के क्रीम या पीले रंग का होता है।ये फूड ग्रेड ग्रीस हैयानी इसे bakery, dairy और beverage industries की मशीनों मेंभी सुरक्षित रूप से लगाया जा सकता है। ये पानी और केमिकल दोनों से बचाव करता है।अब समझिए ग्रीस ग्रेडिंग का फर्क।

आपने अक्सर NLGI-1 या NLGI-2 जैसे नंबर सुने होंगे — ये ग्रीस की कठोरता बताते हैं। NLGI-000 से लेकर NLGI-6 तक स्केल होती है। NLGI 000 या 00 बहुत पतला होता हैलगभग तेल जैसा।NLGI 1 थोड़ा गाढ़ा होता है और ठंडे इलाकों के लिए सही रहता है।NLGI 2 सबसे आम ग्रेड हैजो ऑटोमोबाइल और सामान्य मशीनरी में लगता है।NLGI 3 बहुत गाढ़ा होता हैजो गर्म माहौल या हाई-लोड वाली जगहों में इस्तेमाल होता है।तो जब भी आप ग्रीस खरीदें या लगाएँउसके रंग और ग्रेड दोनों पर ध्यान देना ज़रूरी है।गलत ग्रीस लगाने से मशीन जल्दी घिसती हैऔर सही ग्रीस इस्तेमाल करने से उसकी लाइफ कई गुना बढ़ जाती है। 

याद रखिए –सफेद मतलब जनरल यूज़पीला मतलब पानी वाली जगहलाल मतलब हाई टेम्परेचरकाला मतलब हाई प्रेशरहरा मतलब लॉन्ग लाइफऔर क्रीम मतलब फूड ग्रेड

 


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