Saturday, February 21, 2026

लगेगा साल का पहला पूर्ण चंद्र ग्रहण..


17 फरवरी को साल का पहला सूर्य ग्रहण लग चुका है और अब इसके बाद चंद्र ग्रहण लगने जा रहा है. हालांकि, भारत में सूर्य ग्रहण नहीं दिखाई दिया था, जिसके कारण सूतक काल के नियम भी लागू नहीं हुए थे. पंचांग के अनुसार चंद्र ग्रहण होली पर लगने जा रहा है, साथ ही इस दिन फाल्गुन महीने की पूर्णिमा तिथि भी है. गौरतलब है कि, यह चंद्र ग्रहण भारत में भी दिखाई देगा और सूतक काल के नियम भी मान्य होंगे. इसी कड़ी में आइए जानते हैं, कि चंद्र ग्रहण कब से कब तक लगेगा और सूतक काल का समय क्या रहेगा.



कब लगेगा साल का पहला चंद्र ग्रहण?

साल का पहला चंद्र ग्रहण 3 मार्च को लगने जा रहा है. यह दोपहर 3 बजकर 20 मिनट से लेकर शाम को 6 बजकर 47 मिनट तक रहेगा और इसकी कुल अवधि 3 घंटे 27 मिनट की होगी. यह एक पूर्ण चंद्र ग्रहण होगा, जो पूरे एशिया समेत ऑस्ट्रेलिया में भी नजर आएगा. आपकी जानकारी के लिए बता दें, कि पूर्ण चंद्र ग्रहण एक खगोलीय घटना है, जो तब होती है जब पृथ्वी, सूर्य और चंद्रमा के बीच आ जाती है और सूर्य की किरणें सीधे चंद्रमा तक नहीं पहुंच पातीं है. 

कब से होगा सूतक काल मान्य?

चंद्र ग्रहण का सूतक काल 9 घंटे पहले से मान्य होता है. ऐसे में 3 मार्च को लगने वाले चंद्र ग्रहण की सूतक काल की शुरुआत सुबह 6 बजकर 20 मिनट से होगी.


गर्भवती महिलाओं के लिए विशेष सावधानियां
ग्रहण के दौरान गर्भवती महिलाओं को विशेष सतर्कता बरतने की सलाह दी गई है। ऐसी मान्यता है कि ग्रहण की छाया का सीधा असर गर्भ में पल रहे शिशु पर पड़ सकता है।



* ग्रहण के दौरान घर से बाहर न निकलें और न ही चांद को देखें

* नुकीली चीजों जैसे चाकू, कैंची या सुई का इस्तेमाल बिल्कुल न करें।



* ज्यादा से ज्यादा भगवान का ध्यान करें और धार्मिक ग्रंथों का पाठ करें।

* ग्रहण समाप्त होने के बाद स्नान जरूर करें ताकि नकारात्मकता दूर हो सके।


सूतक काल में क्या करें और क्या न करें?
सूतक काल और ग्रहण के समय भोजन करना, सोना, तेल मालिश करना और बाल काटना वर्जित माना गया है। हालांकि, बच्चे, बुजुर्ग और बीमार व्यक्ति इन नियमों में छूट ले सकते हैं। खाने-पीने की चीजों को दूषित होने से बचाने के लिए उनमें पहले से ही ‘तुलसी के पत्ते’ या ‘कुश’ डाल देना चाहिए। ग्रहण काल में मंत्रों का जाप करना अत्यंत लाभकारी माना जाता है। ग्रहण समाप्त होने के बाद पूरे घर में गंगाजल का छिड़काव करें और अपनी सामर्थ्य के अनुसार दान-पुण्य अवश्य करें, जिससे ग्रहण के नकारात्मक प्रभावों को कम किया जा सके।